रायपुर। चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने का सपना देखने वाले छत्तीसगढ़ के 4 और उम्मीदवार अब कुछ समय तक चुनावी मैदान में नहीं उतर सकेंगे। वजह है, चुनाव में हुए खर्च का निर्धारित तरीके से हिसाब निर्वाचन आयोग को नहीं सौंपना। भारत निर्वाचन आयोग ने इन उम्मीदवारों को तीन साल के लिए निरर्हित कर दिया है। ताजा कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ में ऐसे उम्मीदवारों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है।

दिलचस्प बात यह है कि देशभर में चुनावी व्यय का लेखा निर्धारित नियमों के मुताबिक जमा नहीं करने के मामले में अब तक 529 उम्मीदवारों पर कार्रवाई हो चुकी है। इस आंकड़े में छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां सबसे ज्यादा उम्मीदवार इस प्रावधान की जद में आए हैं।

चार और उम्मीदवार तीन साल के लिए बाहर
आयोग की ताजा कार्रवाई में 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ने वाले चार उम्मीदवार शामिल हैं। इनमें सरायपाली क्षेत्र से अजीत डोलचंद चौहान, महासमुंद विधानसभा क्षेत्र से अशोक कश्यप, चंचल वाणी और बृजलाल ठाकुर के नाम बताए गए हैं। आयोग के मुताबिक संबंधित उम्मीदवार निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत करने में असफल रहे। आवश्यक हिसाब नहीं देने या उसे नियमों के अनुरूप दाखिल नहीं करने के चलते उनके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

आखिर चुनावी खर्च का हिसाब देना क्यों जरूरी?
चुनाव लड़ने वाला हर उम्मीदवार अपने चुनावी खर्च का पूरा रिकॉर्ड रखने के लिए बाध्य होता है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर यह लेखा संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष जमा करना होता है। अगर उम्मीदवार तय समय में खर्च का विवरण नहीं देता या ऐसा न करने के लिए संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर पाता, तो निर्वाचन आयोग के पास उसके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। इसी प्रावधान के तहत आयोग ने इन उम्मीदवारों को तीन वर्ष के लिए चुनाव लड़ने से रोक दिया है।

तीन साल तक लोकसभा-विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे
निरर्हता लागू होने के बाद संबंधित उम्मीदवार आदेश की तारीख से तीन साल तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव नहीं लड़ सकता। हालांकि, यह प्रतिबंध राज्य निर्वाचन आयोग के तहत होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों पर अपने आप लागू नहीं होता। कानून में निर्वाचन आयोग को कुछ परिस्थितियों में निरर्हता की अवधि घटाने या उसे समाप्त करने का अधिकार भी दिया गया है।

मार्च तक 36 पर हो चुकी थी कार्रवाई
ताजा चार मामलों से पहले ही छत्तीसगढ़ में इस साल मार्च तक 36 उम्मीदवारों को चुनावी खर्च का लेखा दाखिल नहीं करने के कारण तीन साल के लिए निरर्हित किया जा चुका था। अब चार नए नाम जुड़ने के बाद यह संख्या 40 हो गई है। यानी चुनावी मैदान में उतरना सिर्फ प्रचार और वोट जुटाने तक सीमित नहीं है। उम्मीदवारों को चुनावी खर्च से जुड़े नियमों और दस्तावेजी प्रक्रिया का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना पड़ता है।

देश में 529 उम्मीदवारों पर कार्रवाई
निर्वाचन आयोग के उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक देशभर में कुल 529 उम्मीदवार चुनावी खर्च का लेखा निर्धारित नियमों के अनुसार प्रस्तुत नहीं करने के कारण निरर्हता की कार्रवाई झेल चुके हैं। इस सूची में छत्तीसगढ़ का आंकड़ा 40 तक पहुंच गया है, जिससे राज्य देश के प्रमुख राज्यों में शामिल हो गया है जहां ऐसे मामलों की संख्या अधिक है। चुनावी खर्च का हिसाब-किताब अब सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि उम्मीदवार की चुनावी पात्रता से सीधे जुड़ा कानूनी दायित्व है। नियमों की अनदेखी का नतीजा तीन साल के चुनावी प्रतिबंध के रूप में सामने आ सकता है।