नई दिल्ली। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने बच्चों की दुनिया को पहले से कहीं बड़ा बना दिया है, लेकिन इसी डिजिटल दुनिया में उनके लिए खतरे भी तेजी से बढ़ रहे हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट और उपलब्ध वैश्विक अध्ययनों ने बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण, उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए अपराधी बच्चों तक पहुंच बना रहे हैं और कई मामलों में भरोसा जीतने के बाद उन्हें शोषण के जाल में फंसा रहे हैं।

दोस्ती से शुरू होता है खेल, फिर ब्लैकमेलिंग तक पहुंचता है मामला
ऑनलाइन अपराधों में अक्सर आरोपी फर्जी पहचान के साथ बच्चों से संपर्क करते हैं। बातचीत और दोस्ती के जरिए उनका विश्वास हासिल करने के बाद उन्हें निजी तस्वीरें या वीडियो साझा करने के लिए उकसाया जाता है। इसके बाद इन्हीं सामग्री का इस्तेमाल धमकी और ब्लैकमेलिंग के लिए किया जा सकता है।ऑनलाइन गेमिंग और चैटिंग प्लेटफॉर्म भी अपराधियों के लिए बच्चों तक पहुंच बनाने का माध्यम बन रहे हैं। समस्या यह है कि बच्चा जिस व्यक्ति से ऑनलाइन बात कर रहा है, उसकी वास्तविक पहचान का पता लगाना कई बार बेहद मुश्किल होता है।

डर और शर्म के कारण सामने नहीं आते कई मामले
ऑनलाइन शोषण का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पीड़ित बच्चे अक्सर घटना की जानकारी किसी को नहीं देते। डर, शर्म, धमकी और बदनामी की आशंका उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर कर सकती है। कई बच्चों को यह भी समझ नहीं आता कि ऑनलाइन हुई घटना अपराध की श्रेणी में आती है। ऐसे में अभिभावकों के लिए केवल बच्चे के स्क्रीन टाइम पर नजर रखना पर्याप्त नहीं है। बच्चे किससे बात कर रहे हैं, कौन-से ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्हें ऑनलाइन किस तरह के संदेश या अनुरोध मिल रहे हैं, इसकी जानकारी भी जरूरी है।

टेक्नोलॉजी कंपनियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल
यूनिसेफ लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया से दूर करना समाधान नहीं है। जरूरत ऐसे सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण की है, जहां बच्चे तकनीक का इस्तेमाल करते हुए शोषण और साइबर अपराध से सुरक्षित रह सकें। इसके लिए प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, प्रभावी रिपोर्टिंग सिस्टम, उम्र के अनुरूप सुरक्षा उपाय और अभिभावकीय नियंत्रण जैसे कदम महत्वपूर्ण माने जाते हैं। संदिग्ध अकाउंट और आपत्तिजनक संपर्क की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करना भी जरूरी है।

बच्चों को डिजिटल सुरक्षा सिखाना अब जरूरी
विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों को इंटरनेट इस्तेमाल करने से रोकने के बजाय उन्हें सुरक्षित तरीके से इंटरनेट का इस्तेमाल करना सिखाना ज्यादा प्रभावी तरीका है। बच्चों को समझाया जाना चाहिए कि वे अपनी निजी तस्वीरें, वीडियो, पासवर्ड, पता या अन्य संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। अगर कोई ऑनलाइन व्यक्ति धमकी देता है या निजी सामग्री के नाम पर ब्लैकमेल करता है, तो बच्चे को डरकर उसकी बात मानने के बजाय तुरंत किसी भरोसेमंद अभिभावक या वयस्क को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

माता-पिता बरतें ये सावधानियां
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए अभिभावक कुछ बुनियादी कदम अपना सकते हैं 

  • बच्चे के सोशल मीडिया और गेमिंग अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग जांचें।
  • अनजान लोगों से चैटिंग को लेकर बच्चों से खुलकर बात करें।
  • निजी तस्वीर या वीडियो किसी के साथ साझा न करने की समझ दें।
  • संदिग्ध मैसेज, अकाउंट या लिंक की जानकारी तुरंत लें।
  • ब्लैकमेलिंग होने पर बच्चे को दोष देने के बजाय उसका साथ दें।
  • जरूरत पड़ने पर संबंधित प्लेटफॉर्म और साइबर अपराध अधिकारियों को शिकायत करें।

डिजिटल दुनिया बच्चों की शिक्षा और मनोरंजन का बड़ा माध्यम बन चुकी है, लेकिन सुरक्षा की अनदेखी गंभीर परिणाम दे सकती है। इसलिए परिवार, स्कूल, सरकार और टेक कंपनियों, सभी की साझा जिम्मेदारी है कि इंटरनेट बच्चों के लिए अवसरों की दुनिया बने, शोषण का अड्डा नहीं।