
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के कामकाज में सुधार तथा कार्यस्थल पर तनाव को संभालने के उद्देश्य से राज्य शासन ने नई पहल की है। मिशन कर्मयोगी के तहत iGOT पोर्टल पर उपलब्ध दो ऑनलाइन कोर्स निर्धारित समयसीमा में पूरे करना अनिवार्य किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों को 31 अक्टूबर तक दोनों कोर्स पूरे करने होंगे। इसके बाद विभागों को 3 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।
तनाव प्रबंधन और योग निद्रा पर आधारित हैं कोर्स
शासन ने कर्मचारियों के लिए दो कोर्स अनिवार्य किए हैं। इनमें पहला ‘कार्यस्थल पर तनाव प्रबंधन’ और दूसरा ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट थ्रू मेडिटेशन एंड योग निद्रा’ है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य कर्मचारियों को कार्यस्थल पर होने वाले तनाव से निपटने के तरीके सिखाना और उनकी कार्यक्षमता बेहतर बनाने में मदद करना है।
विभागाध्यक्षों को सौंपी गई जिम्मेदारी
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों से तय समयसीमा के भीतर दोनों कोर्स पूरे करवाएं। निर्देश के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी का प्रशिक्षण लंबित नहीं रहना चाहिए। सभी विभागों को 3 नवंबर तक कोर्स पूरा होने की जानकारी शासन को देनी होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी दफ्तरों की कार्यप्रणाली पर भी उठते हैं सवाल
सरकारी कार्यालयों में कामकाज बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण और सुधार संबंधी पहल की जाती रही हैं। इसके बावजूद आम लोगों को कई बार अपने काम पूरे कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। शिकायतों के निराकरण में देरी और फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने जैसी समस्याएं भी सामने आती रहती हैं।
ऐसे में कर्मचारियों के तनाव प्रबंधन के साथ-साथ सरकारी सेवाओं की समयबद्ध डिलीवरी, जवाबदेही और लंबित मामलों के निराकरण पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन कोर्स पूरा करने से कार्यस्थल पर व्यवहार और तनाव प्रबंधन में मदद मिल सकती है, लेकिन आम लोगों को राहत मिलने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार भी जरूरी होगा।
3 नवंबर तक शासन को देनी होगी रिपोर्ट
निर्धारित समयसीमा के अनुसार, अधिकारियों और कर्मचारियों को 31 अक्टूबर तक दोनों कोर्स पूरे करने हैं, जबकि विभागों को 3 नवंबर तक इसकी रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। अब यह देखना होगा कि सभी विभाग तय समय में प्रशिक्षण पूरा कराने और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने में कितने सफल होते हैं।