
रायपुर: Chhattisgarh के स्कूल शिक्षा विभाग में 350 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस बड़े फेरबदल में प्राचार्य, व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक शामिल हैं, जिससे प्रदेश की शैक्षणिक व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है। आमतौर पर इस स्तर के ट्रांसफर एक समेकित सूची में जारी होते हैं, लेकिन इस बार आदेश अलग-अलग जारी किए गए, जिसने प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि जारी किए गए आदेशों में डिजिटल या ई-साइन का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि सभी दस्तावेजों पर मैनुअल हस्ताक्षर किए गए हैं। डिजिटल गवर्नेंस के दौर में इस तरह की प्रक्रिया असामान्य मानी जा रही है। इतना ही नहीं, आदेशों की तारीख 24 अप्रैल होने के बावजूद इन्हें करीब 10 दिन बाद सार्वजनिक किया गया, जिससे यह संदेह और गहरा गया है कि फाइलें इतने दिनों तक क्यों रोकी गईं।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि इन तबादला आदेशों को अवकाश के दिन जल्दबाजी में जारी किया गया, जो प्रशासनिक परंपराओं से अलग माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग इन प्रक्रियागत विसंगतियों पर क्या सफाई देता है और क्या भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए कोई सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।