
खैरागढ़: Khairagarh जिले में प्रस्तावित लमती डेम परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। लछना, बोरला, महुआढार और कटेमा सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचकर सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन किया। लोगों का कहना है कि बिना स्पष्ट जानकारी और सहमति के परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे उनके भविष्य पर अनिश्चितता गहरा गई है। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और व्यापक होगा।
विवाद का सबसे बड़ा कारण जमीन को लेकर सामने आई विरोधाभासी स्थिति है। जिन क्षेत्रों को डेम के संभावित डुबान क्षेत्र में बताया जा रहा है, वहीं पर सरकारी योजनाओं के तहत सीसी रोड और आवास निर्माण जैसे विकास कार्य जारी हैं। इस स्थिति ने ग्रामीणों में भ्रम और असंतोष दोनों बढ़ा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार विकास का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ उसी जमीन से विस्थापन की आशंका खड़ी कर रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, लमती नदी केवल जल स्रोत नहीं बल्कि उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। प्रस्तावित डेम के कारण कई बस्तियों के पूरी तरह डूबने का खतरा है, जिससे खेती, रोजगार और बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ेगा। साथ ही, पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, क्योंकि बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र और वन्यजीव प्रभावित हो सकते हैं। ग्रामीणों ने पहले बने प्रधानपाट बैराज की विफलता का हवाला देते हुए नई परियोजना पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि डुबान क्षेत्र से जुड़े सभी दस्तावेज नक्शा, खसरा, एनओसी सार्वजनिक किए जाएं और बिना ग्रामसभा की सहमति कोई भी निर्माण कार्य न किया जाए। सरपंच कमलेश वर्मा ने भी साफ कहा कि गांव में असमंजस की स्थिति है, जहां लोग न तो सुरक्षित महसूस कर पा रहे हैं और न ही भविष्य की योजना बना पा रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस बढ़ते विरोध के बीच क्या रुख अपनाता है।