रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा अब केवल प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी चमक सात समंदर पार भी पहुंच चुकी है। ग्रामोद्योग विभाग के निरंतर प्रयासों से राज्य के बुनकर उच्च गुणवत्ता वाले कोसा, कोसा सिल्क और कौशाल फैब जैसे उत्तम परिधान तैयार कर रहे हैं। इन उत्पादों को अपनाकर आम नागरिक न केवल पारंपरिक कला का सम्मान कर रहे हैं, बल्कि बुनकरों को आर्थिक संबल भी प्रदान कर रहे हैं।

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हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रीमियम ब्रांड ‘कोशल फैब’ (Koshal Fab) का शुभारंभ किया, जो ‘लूम टू लग्जरी’ की अवधारणा पर आधारित है।

खास बातें:

  •  ऑनलाइन मार्केट में कदम: गांधी जयंती के अवसर पर ‘बिलासा हैंडलूम’ की व्यावसायिक वेबसाइट (bilasahandloom.co.in) का लोकार्पण किया गया, जिससे उत्पादों की ऑनलाइन मार्केटिंग और बिक्री को बड़ा बल मिला है।
  •   अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग: ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार के नेतृत्व में जांबिया, मोरक्को, गिनी-बिसाऊ और सेनेगल जैसे अफ्रीकी देशों के व्यावसायिक प्रतिनिधियों के साथ वर्चुअल व्यापारिक परिचर्चा हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ के कोसा सिल्क धागों और व्यापार की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
  •  रोजगार के अवसर: ‘अमारी सिल्क’ (अहिंसा सिल्क) ब्रांड के लॉन्च होने से 11 जिलों की 360 महिलाओं को रोजगार मिला है।

विभाग द्वारा बुनकरों को उन्नत करघे, वर्कशेड-सह-आवास, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कोसा उत्पादन में छत्तीसगढ़ अग्रणी राज्य बनकर उभरा है, जिससे जांजगीर-चांपा समेत कई जिलों में यह उद्योग फल-फूल रहा है और हजारों ग्रामीणों को अतिरिक्त आय हो रही है।

सरकार ने अपील की है कि हम सभी छत्तीसगढ़ के बुनकरों और शिल्पियों को समर्थन दें, उनके उत्पादों को अपनाएं और उनकी आजीविका को समृद्ध बनाएं। कोसा सिल्क न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम भी है।

अधिक जानकारी के लिए ग्रामोद्योग विभाग की वेबसाइट पर विजिट करें।