बिलासपुर।छत्तीसगढ़ के न्यायिक और प्रशासनिक महकमे से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। प्रदेश में पदस्थ पांच सिविल जजों (जूनियर डिवीजन) ने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। राज्य शासन के विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अनुशंसा पर इन सभी पांचों जजों के त्यागपत्र को स्वीकार कर लिया है। साथ ही इन्हें सेवा से कार्यमुक्त (रिलीव) करने का आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है। इतनी कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद एक साथ पांच जजों के पद छोड़ने से कानूनी और प्रशासनिक हलकों में खासी चर्चा है।

इन न्यायिक अधिकारियों ने छोड़ा पद

विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार, जिन न्यायिक अधिकारियों का इस्तीफा मंजूर किया गया है, वे रायपुर, दुर्ग और महासमुंद जैसे प्रमुख जिलों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस्तीफा देने वाले जजों में शामिल हैं:

 द्विब सिंह सेंगर - सिविल जज (जूनियर डिवीजन), दुर्ग

 प्रिय दर्शन गोस्वामी - चतुर्थ सिविल जज (जूनियर डिवीजन), महासमुंद

 कुमारी नंदनी पटेल - सिविल जज (जूनियर डिवीजन), रायपुर

 कुमारी भामिनी राठी - अष्टम सिविल जज (जूनियर डिवीजन), रायपुर

 अर्पित गुप्ता - प्रथम सिविल जज (जूनियर डिवीजन), रायपुर

इस्तीफे की वजह व्यक्तिगत , लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, न्यायिक सेवा में पदस्थ इन सभी पांचों सिविल जजों ने अपने पद से त्यागपत्र देने के पीछे 'व्यक्तिगत कारणों' का हवाला दिया है। नियमतः जब इन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा, तो हाईकोर्ट ने इसकी प्रक्रियागत जांच की। जांच पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने इन इस्तीफों को मंजूर करने के लिए राज्य शासन के विधि एवं विधायी कार्य विभाग (लॉ डिपार्टमेंट) को अपनी अनुशंसा भेज दी। इसी अनुशंसा के आधार पर शासन ने मुहर लगाते हुए इन्हें अप्रैल माह में ही कार्यमुक्त कर दिया है।

आखिर क्यों हुआ मोहभंग? उठ रहे सवाल

सिविल जज (CJ) की परीक्षा राज्य लोक सेवा आयोग और हाईकोर्ट के समन्वय से आयोजित की जाने वाली सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। वकालत की पढ़ाई करने वाले हजारों युवा इस पद के लिए सालों तक दिन-रात एक करते हैं। ऐसे में इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा को पार कर जज की कुर्सी और इतना बड़ा रुतबा हासिल करने वाले इन पांच अधिकारियों का अचानक नौकरी छोड़ना हर किसी को चौंका रहा है।

एक साथ पांच जजों के इस तरह सामूहिक त्यागपत्र ने आम जनमानस के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि करियर की शुरुआत में ही आखिर ऐसी क्या वजह रही होगी कि इन होनहार युवाओं ने एक सुरक्षित और सम्मानजनक करियर को यूं अचानक अलविदा कह दिया। क्या इसके पीछे कोई अन्य बेहतर करियर विकल्प है या फिर न्यायिक सेवा का वर्कलोड? कारण जो भी हो, फिलहाल यह हाई-प्रोफाइल इस्तीफा पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।