
कोरिया। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से सामने आई एक भयावह घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और रेत कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनहत क्षेत्र में भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला सिंह की जिंदा जलकर मौत के मामले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों तक को झकझोर कर दिया है।
इस घटना को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि मृतक और आरोपी पक्ष, दोनों के सत्ताधारी दल से जुड़े होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि रेत कारोबार, राजनीतिक संरक्षण और क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
रेत विवाद से शुरू हुआ खूनी अंत?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृतक भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार और आरोपी पक्ष के बीच लंबे समय से रेत उत्खनन और उससे जुड़े कारोबार को लेकर विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ घंटे पहले भी दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई थी, जिसकी सूचना स्थानीय पुलिस तक पहुंची थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि विवाद की जानकारी पहले से थी, तो क्या समय रहते कोई प्रभावी कदम उठाया गया? क्या संभावित हिंसा को रोका जा सकता था?
फॉर्च्यूनर को टक्कर, फिर आग... मौत में बदल गई दुश्मनी
पुलिस के अनुसार, आरोप है कि फॉर्च्यूनर वाहन को पहले भारी वाहन से टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त किया गया और बाद में उसमें आग लगा दी गई। इस घटना में भरत सिंह गहरवार की मौत हो गई, जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह हाल के वर्षों की सबसे सनसनीखेज और निर्मम घटनाओं में से एक मानी जाएगी।
सत्ता से जुड़े नाम और बढ़े सवाल
मामले में जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है, उनके भी राजनीतिक रूप से सक्रिय होने की चर्चा है। हालांकि पुलिस जांच अभी जारी है और दोष तय होना बाकी है, लेकिन घटना ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी गंभीर आपराधिक मामले में सत्ताधारी दल से जुड़े नाम सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से प्रशासनिक निष्पक्षता और प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े होने लगते हैं।
कांग्रेस का हमला, सरकार पर संरक्षण के आरोप
घटना के बाद कांग्रेस ने इसे रेत कारोबार से जुड़े कथित संघर्ष का परिणाम बताते हुए सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में रेत कारोबार को लेकर हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार ऐसे मामलों को रोकने में विफल साबित हो रही है। हालांकि कांग्रेस के ये आरोप राजनीतिक बयान हैं और इनकी पुष्टि किसी जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है।
सरकार का जवाब – दोषियों पर होगी कार्रवाई
वहीं उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कांग्रेस पर घटना का राजनीतिकरण करने का आरोप भी लगाया है।
कानून-व्यवस्था पर फिर खड़े हुए सवाल
इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर रेत कारोबार को लेकर विवाद इतनी हिंसक घटनाओं में क्यों बदल रहे हैं? क्या अवैध उत्खनन, आर्थिक हितों और स्थानीय प्रभाव की लड़ाई ने हालात को खतरनाक बना दिया है? फिलहाल, पुलिस जांच जारी है, कई आरोपी हिरासत में हैं और कुछ की तलाश की जा रही है। लेकिन भरत सिंह गहरवार की मौत ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया है कि क्या रेत का कारोबार अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि खूनी संघर्ष का कारण भी बनता जा रहा है?