नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के बीच पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का संसद परिसर में किया गया विरोध प्रदर्शन अब कानूनी विवाद में बदल गया है। राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर किए गए सांकेतिक प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उधर, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी संसद परिसर में इस तरह के प्रदर्शनों पर नाराजगी जताते हुए सांसदों को संसदीय मर्यादा का पालन करने की नसीहत दी है।

भगवा वेशभूषा में किया सांकेतिक प्रदर्शन
मानसून सत्र के दौरान पप्पू यादव ने संसद परिसर में भगवा वेशभूषा पहनकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने नुक्कड़ नाटक के जरिए राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद इस घटना को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।

दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR
शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले से जुड़े वीडियो फुटेज, शिकायत और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जताई नाराजगी
संसद परिसर में हुए इस विरोध प्रदर्शन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च संस्थान है और उसकी गरिमा, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे अपनी बात संसद के भीतर संसदीय नियमों के तहत रखें और परिसर को राजनीतिक प्रदर्शन का मंच न बनाएं। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने की सलाह भी दी है।

चंदा विवाद को लेकर बढ़ी सियासी गर्मी
पप्पू यादव और कुछ विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

जांच पर टिकी राजनीतिक नजर
दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत दर्ज किया गया है और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन की सीमाओं, संसदीय आचरण और नियमों को लेकर नई राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।