रायपुर। छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग में इन दिनों हजारों करोड़ का बड़ा गड़बड़झाला चल रहा है। अफसरशाही ने नियमों को ऐसे मरोड़ा है कि जो कंपनियां टेंडर की रेस में दौड़ने लायक ही नहीं हैं, उन्हें ही जीत का ताज पहनाने की पूरी तैयारी हो चुकी है। 27 जुलाई 2026 को टेंडर के रेट डिक्रिप्ट होते ही जो खुलासा हुआ ,वह किसी बड़े फर्जीवाड़े की पूरी पटकथा बयान कर रहा है। आधिकारिक वित्तीय बोली तुलना रिपोर्ट में तीन अयोग्य कंपनियों को सबसे कम बोली लगाने वाला घोषित कर टेंडर थमाने की रास्ता पक्का कर दिया गया है।

शर्तों में ही भारी विरोधाभास और झोल

टेंडर के पन्नों में शर्तों को ही आपस में लड़ा दिया गया है। निविदा की कंडिका 1.3a और 1.3b दोनों आपस में भारी विरोधाभास प्रकट करती हैं। पहली शर्त कहती है कि बीते पांच सालों (2021 से 2024-25) के बीच किसी वर्ष में कंपनी का वार्षिक टर्नओवर वेटेज सहित कम से कम 1019 करोड़ होना चाहिए। वहीं दूसरी शर्त (1.3b) पलटकर कहती है कि इन्हीं पांच सालों में टर्नओवर निविदा राशि 2549.86 करोड़ का दोगुना यानी 5099.72 करोड़ होना चाहिए।

अब इसमें दिलीप बिल्डकॉन की बुद्धिमानी देखिए। निविदा में सिर्फ प्राइम ठेकेदार का अनुभव मांगा गया था, लेकिन कंपनी ने जॉइंट वेंचर (JV) का प्रमाण पत्र चिपका दिया, जिसकी अनुमति ही नहीं थी। इसमें दिलीप बिल्डकॉन की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत और स्काई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मुंबई की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत है। इस 65 प्रतिशत हिस्सेदारी के हिसाब से दिलीप बिल्डकॉन के अनुभव की गणना करें, तो 1302.29 करोड़ का 65% केवल 846.48 करोड़ बैठता है, जिसे 27 दिसंबर 2024 को अधूरा (पार्टली कम्प्लीट) बताया गया है। वेटेज के साथ भी यह आंकड़ा 931.10 करोड़ ही पहुंचता है।

यह आंकड़ा टेंडर की क्लॉज 4.1 की धज्जियां उड़ाता है, जो चीख-चीख कर कह रही है कि 2549.86 करोड़ का 50 प्रतिशत यानी 1274.9 करोड़ के कार्य का अनुभव अनिवार्य है। दिलीप बिल्डकॉन 931.10 करोड़ के तजुर्बे के साथ पात्रता के आस-पास भी नहीं फटकती। गौर करने वाली बात यह है कि जिस सौ प्रतिशत अनुभव वाले प्रमाण पत्र (जो ग्वालियर से चालू हुआ) को आधार बनाकर यह खेल चल रहा है, उसे मध्य प्रदेश सरकार पहले ही फर्जी बताकर री-कैलकुलेट करने का निर्देश दे चुकी है।

अनुभव शून्य, फिर भी हजारों करोड़ का काम

अनुभव के नाम पर झोल यहीं खत्म नहीं होता। एनेक्सचर-I (कंडिका 1.2) में 90 किलोमीटर एमएस पाइप बिछाने का कार्यानुभव मांगा गया था, जो दिलीप बिल्डकॉन के 65 प्रतिशत वाले कागज में पूरी तरह नदारद है। सिकासर, मटनार और सिरपुर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स (कंडिका 4.1b) के लिए रेडियल गेट का 5 साल का अनुभव चाहिए था, वो भी इन कंपनियों के खाते में शून्य है।

दूसरी तरफ ओम मेटल्स का हाल भी अलग नहीं है। महानदी नदी पर तहसील आरंग (जिला रायपुर) में मोहमेला सिरपुर बैराज परियोजना और पाइप सिंचाई नेटवर्क के 568 करोड़ से ज्यादा का टेंडर जिस कंपनी को देने की तैयारी है, उसके पास सिमिलर नेचर के काम का अनुभव ही नहीं है। उज्जैन के सिंहस्थ घाट निर्माण में इसी कंपनी को काम पाने के लिए तीन अन्य कंपनियों के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर की बैसाखी लेनी पड़ी थी।

वहीं, मटनार बहुउद्देशीय लिफ्ट सिंचाई बैराज तथा देउरगांव बैराज लिफ्ट सिंचाई परियोजना के 1633 करोड़ के काम में एनसीसी लिमिटेड को पहला स्थान देकर नवाजने की तैयारी है। पैरी परियोजना योजना के अंतर्गत सिकासर से कोदार जलाशय लिंक नहर (जहां 32 हजार क्यूसेक पानी की आपूर्ति होनी है) का 2524 करोड़ का काम दिलीप बिल्डकॉन को सौंपा जा रहा है। इस काम में परीक्षण ट्रायल रन और कमीशनिंग का जिम्मा भी शामिल है।

कार्यालय में बैठकर उच्चाधिकारियों को किया गया गुमराह

यह पूरा ताना-बाना जल संसाधन विभाग के शीर्ष कार्यालय में बुना जा रहा है। विभाग की सचिव महोदय ने शासन के नियमों को ताक पर रखकर चीफ सेक्रेटरी और सरकार की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है। उच्चाधिकारियों को गुमराह कर टेंडर की शर्तों में मनमाना बदलाव करवाया गया। इन कंपनियों को सिर्फ निर्माण नहीं, बल्कि 5 से 10 साल तक पूरे सिस्टम का मेंटेनेंस भी करना है।

निविदा की क्लॉज 4.1 (b) (i), (ii) एवं (iii) तथा एनेक्सचर-II के अनुसार विगत पांच वर्षों में निर्धारित पात्रता के अनुरूप कार्यानुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य था। किन्तु ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत दोनों कार्यानुभव प्रमाण जॉइंट वेंचर (JV) के हैं। जेवी में वास्तविक भागीदारी (Share) के आधार पर उनका कार्यानुभव निविदा में निर्धारित न्यूनतम पात्रता को किसी भी सूरत में पूरा नहीं करता। इसके बावजूद कूटरचना कर नियमों के विपरीत जाकर प्रमाण पत्र जारी किया गया है। सरकार को फौरन दस्तावेजों की बारीकी से जांच करानी चाहिए, ताकि जनता की गाढ़ी कमाई लूट की भेंट न चढ़े और अयोग्य कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सके।