नई दिल्ली: फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 समिट में भारत की आवाज़ एक बार फिर वैश्विक मंच पर मजबूती से सुनाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके असर का मुद्दा उठाते हुए भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। खास बात यह रही कि जब पीएम मोदी यह मुद्दा उठा रहे थे, उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के कई बड़े नेता मौजूद थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है और इसे सुरक्षित रखना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि संघर्षों की कीमत निर्दोष नागरिक और नाविक चुका रहे हैं। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।PM_Modi_at_G7_Summit_1781667371

G7 के हाई लेवल वर्किंग सेशन में पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज भी बुलंद की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब विकासशील देश केवल सहायता नहीं, बल्कि सम्मानजनक और समान साझेदारी चाहते हैं। उन्होंने दुनिया को यह संदेश दिया कि दाता और लाभार्थी की सोच से आगे बढ़कर साझेदारी और विश्वास के नए युग की शुरुआत करनी होगी।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने 'ट्रस्ट डेफिसिट' यानी वैश्विक स्तर पर बढ़ती विश्वास की कमी को सबसे बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के पास संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन भरोसे की कमी लगातार गहराती जा रही है। यही वजह है कि संवाद, कूटनीति और सहयोग ही भविष्य के संघर्षों का स्थायी समाधान बन सकते हैं।

समिट के दौरान पीएम मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई देशों के नेताओं से मुलाकात भी हुई। इन बैठकों को वैश्विक रणनीतिक साझेदारी और भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका के नजरिए से अहम माना जा रहा है।