
बिलासपुर : शहर के आसपास खेतों को टुकड़ों में बांटकर प्लॉट बेचने का खेल अब नगर निगम की कार्रवाई के निशाने पर है। बिना लेआउट और जरूरी अनुमति के विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग पर निगम ने बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया है। चिल्हाटी और अशोक नगर में प्लॉट खरीदारों को आकर्षित करने के लिए बनाई गई कांक्रीट सड़कों को निगम की टीम ने उखाड़ दिया। वहीं चिल्हाटी चौक पर बिना पार्किंग के बनाई गई तीन दुकानों को सील कर दिया गया। मोपका के धान मंडी रोड पर बिना लेआउट बनाए जा रहे तीन मकानों के सामने का हिस्सा भी तोड़ दिया गया।
निगम में शामिल होते ही पंचायतों में बढ़ी अवैध प्लाटिंग की शिकायतें
पिछले कुछ वर्षो में नगर निगम सीमा में 18 पंचायत क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके बाद नए जुड़े क्षेत्रों में जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री और प्लाटिंग की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। निगम के आठों जोन में ऐसी शिकायतें पहुंची हैं, जहां खेतों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर बिना डायवर्सन और लेआउट स्वीकृति के प्लॉट काटे जा रहे हैं। कई जगहों पर खरीदारों को आकर्षित करने के लिए कांक्रीट सड़क तक बना दी गई थी।
अशोक नगर में पौन एकड़, चिल्हाटी में ढाई एकड़ जमीन पर कार्रवाई
निगम की टीम ने अशोक नगर में सरस्वती शिशु मंदिर के पीछे अनिल अग्रवाल की करीब पौन एकड़ जमीन और चिल्हाटी में नारद वर्मा की करीब दो से ढाई एकड़ जमीन पर कार्रवाई की। निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे के निर्देश पर अतिक्रमण दस्ते और संबंधित जोन की टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान अवैध प्लाटिंग के लिए बनाई गई कांक्रीट सड़कों को बुलडोजर से उखाड़ दिया गया।
पार्किंग की नहीं थी व्यवस्था, तीन दुकानें सील
चिल्हाटी चौक पर रोड किनारे बनाई गई तीन दुकानों पर भी निगम ने कार्रवाई की। भवन अधिकारी अनुपम तिवारी के अनुसार, लता पटेल द्वारा बनाई गई दुकानों में पार्किंग की व्यवस्था नहीं थी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तीनों दुकानों को सील कर दिया गया।
मोपका में मकान बेचने की थी तैयारी, निर्माण का हिस्सा ढहाया
धान मंडी रोड मोपका में मनीष उभरानी द्वारा बिना लेआउट स्वीकृति के तीन मकानों का निर्माण कराया जा रहा था। निगम के अनुसार, इन मकानों का निर्माण बिक्री के उद्देश्य से किया जा रहा था। टीम ने मौके पर पहुंचकर तीनों मकानों के सामने का हिस्सा बुलडोजर से तोड़ दिया।
नोटिस के बाद अब न्यायालय में परिवाद की तैयारी
निगम प्रशासन ने चारों मामलों में संबंधित मकान और जमीन मालिकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। निगम के अनुसार, कार्रवाई में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 292(ग)(2) और छत्तीसगढ़ नगर पालिका (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रेशन, निबंधन एवं शर्तें) नियम 2013 के नियम 3, 10 और 13 का उल्लंघन पाया गया है। संबंधित अवैध प्लाटिंगकर्ताओं के खिलाफ न्यायालय में परिवाद दायर करने की तैयारी भी की जा रही है।
एफआईआर के बाद हो सकती हैं जमीन राजसात की कार्रवाई
निगम अधिकारियों के मुताबिक कालोनाइजर एक्ट के तहत अवैध प्लाटिंग के मामलों में केवल निर्माण तोड़ने तक कार्रवाई सीमित नहीं है। नियमों के उल्लंघन पर एफआईआर दर्ज कराने से लेकर भूखंड राजसात करने तक का प्रावधान है। निगम ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति प्लाटिंग, अवैध कॉलोनी विकास और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
प्लॉट खरीदने से पहले कर ले जरूरी जांच
निगम ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्लॉट की खरीद से पहले कॉलोनी की वैधता, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति, लेआउट और नगर निगम से मिली स्वीकृतियों की जांच जरूर करें। कागजों की जांच किए बिना खरीदा गया प्लॉट बाद में विवाद और कार्रवाई का कारण बन सकता है।
