
सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में एक तेंदुए की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। बिलाईगढ़ वन परिक्षेत्र के गत धाराशिव बीट अंतर्गत कक्ष क्रमांक 446 में तेंदुए का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। जंगल के भीतर वन्यजीव का शव मिलने की सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन मंडलाधिकारी पुष्पलता टंडन ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और जांच से जुड़े अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मृत तेंदुए की उम्र लगभग 12 वर्ष बताई जा रही है।
हाथियों की सर्चिंग के दौरान मिला तेंदुए का शव
जानकारी के अनुसार, वन विभाग को संबंधित वन क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी और उनकी लगातार आवाजाही की सूचना मिली थी। इसके बाद हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी संभावित खतरे से बचाव के लिए वन विभाग की टीम जंगल में सर्चिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान टीम की नजर कक्ष क्रमांक 446 में पड़े तेंदुए के शव पर पड़ी।
तेंदुए का शव देखते ही वन अमले ने इसकी सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही वन मंडलाधिकारी पुष्पलता टंडन अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के निर्देश दिए। फिलहाल तेंदुए की मौत के कारणों को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं।
डॉग स्क्वायड की दो टीमें जांच में जुटीं
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। तेंदुए की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए तीन पशु चिकित्सकों की टीम गठित की गई, जिसने शव का पोस्टमार्टम किया। इसके अलावा संभावित साक्ष्य जुटाने और घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों का पता लगाने के लिए डॉग स्क्वायड की दो टीमों को भी लगाया गया है।
वन विभाग का अमला आसपास के जंगल और संदिग्ध स्थानों की बारीकी से जांच कर रहा है। अधिकारियों की कोशिश है कि तेंदुए की मौत से जुड़े सभी पहलुओं का पता लगाया जाए, ताकि यदि किसी तरह की आपराधिक गतिविधि सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
48 घंटे बाद मिला शव, वन विभाग की गश्त पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल वन विभाग की नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। जानकारी के मुताबिक, तेंदुए का शव करीब 48 घंटे बाद वन विभाग की टीम को मिला। हैरानी की बात यह है कि जंगल में वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी के लिए मैदानी स्तर पर कर्मचारियों की तैनाती रहती है, इसके बावजूद इतने बड़े वन्यजीव की मौत की जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिल पाई?
अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या संबंधित क्षेत्र में नियमित गश्त की जा रही थी? यदि वन विभाग का अमला लगातार निगरानी कर रहा था, तो तेंदुए का शव दो दिन तक जंगल में कैसे पड़ा रहा? क्या मैदानी कर्मचारियों की लापरवाही के कारण घटना की जानकारी देर से मिली? हालांकि, इन सवालों पर विभागीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हत्या, प्राकृतिक मौत या कोई दूसरी वजह
तेंदुए की संदिग्ध मौत के बाद कई संभावनाओं पर जांच की जा रही है। आशंका है कि उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई हो सकती है या फिर किसी अन्य वजह से उसकी जान गई हो। वहीं, वन्यजीव की हत्या की आशंका को भी जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जा रहा है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर ही मौत की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।
पोस्टमार्टम के बाद किया गया अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन विभाग ने मृत तेंदुए का विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर दिया। मामले में प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच और कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। देखना होगा कि करीब 12 वर्ष के इस तेंदुए की मौत के पीछे क्या वजह सामने आती है और क्या वन क्षेत्र में गश्त एवं निगरानी में संभावित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।