
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। एक 16 वर्षीय छात्रा के साथ चलती स्लीपर बस में कथित सामूहिक दुष्कर्म का आरोप है। पुलिस ने मामले में बस के चालक और परिचालक को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में इस्तेमाल बताई जा रही बस को भी जब्त किया गया है। पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही। छात्रा की शिकायत और मेडिकल जांच के बाद मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और POCSO Act के तहत कार्रवाई की गई है।
स्लीपर बस के अंदर हुई वारदात
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, छात्रा को कथित तौर पर बस के चालक और परिचालक ने जबरन बस के अंदर खींच लिया। आरोप है कि इसके बाद चलती बस में उसके साथ यौन हिंसा की गई। बस की खिड़कियों पर लगे पर्दों के कारण बाहर से अंदर की गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही थीं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के दौरान बस किस-किस स्थान से होकर गुजरी और उस समय उसमें अन्य लोग मौजूद थे या नहीं।
47 किलोमीटर के सफर के दौरान हुई कथित वारदात
पुलिस जांच के मुताबिक, बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही और इसी दौरान छात्रा के साथ कथित अपराध हुआ। घटना के बाद छात्रा को कथित तौर पर बस से छोड़ दिया गया। इसके बाद उसने अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।
मेडिकल जांच के बाद दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने छात्रा की मेडिकल जांच कराई। जांच और पीड़िता के बयान के आधार पर मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। नाबालिग होने के कारण पुलिस ने मामले को POCSO Act के प्रावधानों के तहत दर्ज किया है। मामले की जांच के दौरान पीड़िता की पहचान और निजता को सुरक्षित रखना भी पुलिस की जिम्मेदारी है।
ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीमों ने आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस के मुताबिक, सर्विलांस और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के आधार पर बस के चालक और परिचालक को गिरफ्तार कर लिया गया। वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस को भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। अब बस की तकनीकी जांच और उससे जुड़े साक्ष्यों को जुटाने की प्रक्रिया की जा रही है।
CCTV और अन्य साक्ष्य जुटा रही पुलिस
जांच एजेंसियां घटना से जुड़े तमाम साक्ष्यों को जुटा रही हैं। पुलिस बस के रूट, CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर सकती है, ताकि घटना की पूरी कड़ी सामने आ सके। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने घटना को अंजाम देने के बाद पीड़िता को कहां छोड़ा और वारदात से पहले तथा बाद में उनकी गतिविधियां क्या थीं।
BNS और POCSO के तहत कार्रवाई
दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और POCSO Act की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
नाबालिग की सुरक्षा और निजता सबसे अहम
यह मामला एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। खासकर स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा, CCTV निगरानी, चालक-परिचालक की जवाबदेही और शिकायत तंत्र को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है और गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई अदालत में होगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।