नई दिल्ली। दिल्ली के पुल प्रहलादपुर इलाके में हुए गुड्डू बादशाह हत्याकांड की जांच ने बिहार से दिल्ली और फिर कई राज्यों तक फैली साजिश का खुलासा किया है। दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस ने करीब सवा महीने की जांच के बाद मामले में 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या किसी अचानक हुए विवाद का नतीजा नहीं थी, बल्कि बिहार के सुपौल में वर्चस्व को लेकर चल रही गैंगवार का हिस्सा थी। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस टीमों ने दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु में करीब 12 हजार किलोमीटर का सफर तय किया।

पहले साथ थे, फिर अलग गैंग बनाया
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक मो. इरशाद आलम उर्फ गुड्डू बादशाह सुपौल में अपना गिरोह चलाता था। आरोपी शमशाद और अशफाक कभी उसी गैंग का हिस्सा थे, लेकिन पैसों के लेन-देन को लेकर दोनों भाइयों का गुड्डू से विवाद हो गया। इसके बाद उन्होंने अलग गिरोह बना लिया। पुलिस के अनुसार, सुपौल में अपना दबदबा कायम करने के लिए दोनों ने गुड्डू को रास्ते से हटाने की कथित साजिश रची।

‘समझौते’ की बात बनी हत्या का जाल
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने पुराने विवाद को खत्म करने और समझौता कराने के बहाने गुड्डू को बिहार से दिल्ली बुलाया। दिल्ली पहुंचने के बाद उसे पुल प्रहलादपुर के लाल कुआं इलाके में एक किराए के मकान में ले जाया गया। आरोप है कि यहीं पहले से तैयार साजिश के तहत उस पर गोलियां चलाई गईं। 28 जुलाई को लाल कुआं स्थित चुंगी नंबर-3 के पास गोलीबारी की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। वहां गुड्डू बादशाह मृत मिला, जबकि मो. फारुख गोली लगने से घायल अवस्था में मिला।

घायल बनकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश?
जांच के शुरुआती दौर में फारुख ने खुद को घटना में घायल हुआ पीड़ित बताया। लेकिन पुलिस को उसके बयान और घटनास्थल से मिले सबूतों में कई विरोधाभास नजर आए। इसके बाद कॉल डिटेल रिकॉर्ड, तकनीकी निगरानी, स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने उसकी भूमिका की जांच आगे बढ़ाई। पुलिस का दावा है कि फारुख ने गुड्डू का भरोसा हासिल किया था और उसे कथित समझौते के नाम पर उस जगह तक लाने में अहम भूमिका निभाई। उसे घटना वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था।

एक-एक कर अलग-अलग राज्यों से पकड़े गए आरोपी
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने आरोपियों की लोकेशन और आपसी संपर्कों को ट्रैक किया। इसके बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, तेलंगाना और तमिलनाडु तक कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमों ने करीब 12 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। गिरफ्तार आरोपियों में मो. फारुख, मो. आफताब, मो. इरफान, मो. शमशाद, मो. अशफाक, मो. रहमतुल्लाह उर्फ छोटू, अमन यादव और मो. शोएब अख्तर शामिल हैं।

किसकी क्या भूमिका सामने आई?
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित साजिश में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। फारुख पर गुड्डू को बुलाने और आरोपियों के बीच समन्वय कराने का आरोप है। आफताब ने कथित तौर पर हमलावरों के आने-जाने और ठहरने की व्यवस्था में मदद की। इरफान पर घटना के बाद आरोपियों को पनाह देने और हथियार छिपाने का आरोप है। शमशाद और अशफाक को पुलिस ने कथित तौर पर साजिश के प्रमुख किरदारों में शामिल बताया है। वहीं रहमतुल्लाह पर हमले में शामिल होने और बाद में सबूतों को हटाने में मदद करने का आरोप है। शोएब पर हमलावरों के साथ दिल्ली आने-जाने का आरोप है। अमन यादव पर लाल कुआं इलाके में रहने और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्था करने तथा कथित तौर पर फायरिंग में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

हथियारों की बरामदगी, फोरेंसिक जांच जारी
पुलिस ने आरोपियों से एक अवैध पिस्तौल, अतिरिक्त मैगजीन और कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, दो अन्य कथित अवैध हथियारों और मामले से जुड़े सामान की बरामदगी के प्रयास भी जारी हैं। बरामद हथियारों और कारतूसों को फोरेंसिक तथा बैलिस्टिक जांच के लिए भेजा गया है।

गैंगवार की पुरानी कहानी ने लिया खूनी मोड़
पुलिस की जांच में फिलहाल हत्या के पीछे मुख्य वजह सुपौल में गैंग के वर्चस्व और पुराने विवाद को माना जा रहा है। शमशाद और अशफाक का पहले गुड्डू के साथ रहना और बाद में अलग गिरोह बनाना इस केस की अहम कड़ी बताई जा रही है। पुलिस अब आरोपियों के डिजिटल संपर्क, हथियारों के स्रोत और हत्या की साजिश में शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। हालांकि, पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं और मामले में आरोपियों की अंतिम दोषसिद्धि अदालत के फैसले पर निर्भर करेगी।