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इंदौर। Madhya Pradesh High Court Indore Bench ने बहुचर्चित Bhojshala विवाद पर बड़ा फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यहां हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार मिलेगा, जबकि मस्जिद पक्ष चाहे तो सरकार से अलग जमीन आवंटित करने की मांग कर सकता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इंग्लैंड में मौजूद मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने के प्रयास करने का भी निर्देश दिया है। फैसले के बाद हिंदू संगठनों में खुशी का माहौल है, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।
करीब चार वर्षों तक चली सुनवाई में हिंदू पक्ष ने भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और विद्या केंद्र बताया था, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा। अदालत में मंदिर पक्ष की ओर से अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain ने दलीलें पेश कीं, वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Salman Khurshid सहित अन्य वकीलों ने पक्ष रखा। फैसले के बाद विष्णु शंकर जैन ने कहा कि यह हिंदू समाज की आस्था और अधिकारों की बड़ी जीत है। वहीं अदालत ने अंतरसिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दोनों समुदायों के बीच साझा व्यवस्था बनाए रखने की मांग की गई थी।
फैसले के बाद Dhar सहित आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया है और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी गई है। पुलिस लगातार गश्त कर रही है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या तनाव की स्थिति को रोका जा सके। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है और आने वाले दिनों में यह मामला राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन सकता है।