धरमजयगढ़। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में बच्चों में कुपोषण की समस्या स्वास्थ्य विभाग के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। दुर्गम पहाड़ी और वनांचल इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच के कारण कई परिवार समय पर बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल नहीं ला पाते। ऐसे में जब बच्चे की हालत बिगड़ती है, तब उन्हें इलाज के लिए सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ लाया जाता है। इलाके में बढ़ते कुपोषण के मामलों के बीच पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। यहां गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी के साथ पौष्टिक आहार और जरूरी उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अब भी चुनौती
धरमजयगढ़ विकासखंड का बड़ा हिस्सा जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में फैला हुआ है। कई गांव मुख्य स्वास्थ्य केंद्रों से काफी दूर हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच और पोषण संबंधी जागरूकता की कमी के कारण बच्चों की स्थिति शुरुआती दौर में सामने नहीं आ पाती। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य शिविरों और जागरूकता गतिविधियों की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है, ताकि बच्चों में पोषण की कमी की पहचान समय रहते की जा सके।kuposhan-1-1.jpg

माताओं के पोषण पर भी ध्यान जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के पोषण का सीधा संबंध गर्भावस्था और माताओं के स्वास्थ्य से भी जुड़ा है। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में कई महिलाएं घरेलू कामकाज और अन्य जिम्मेदारियों के बीच अपने खान-पान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पातीं। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और संतुलित आहार की कमी का असर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ जन्म लेने वाले बच्चों पर भी पड़ सकता है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती महिलाओं और बच्चों की नियमित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

कुपोषित बच्चों के लिए NRC बना अहम सहारा
सरकारी व्यवस्था के तहत गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराया जाता है। यहां बच्चों को चिकित्सकीय देखरेख, पौष्टिक भोजन और आवश्यक उपचार दिया जाता है। खास बात यह है कि बच्चों के साथ उनकी माताओं को भी NRC में रहने की सुविधा दी जाती है, जिससे मां को बच्चे की देखभाल और पोषण संबंधी जरूरी जानकारी भी दी जा सके।kuposhan-3.jpg

240 बच्चों को सुपोषित करने का लक्ष्य
धरमजयगढ़ NRC को इस वर्ष 240 कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का लक्ष्य दिया गया है। वर्ष 2004 से संचालित इस व्यवस्था के तहत क्षेत्र के दूर-दराज गांवों से भी परिजन अपने बच्चों को उपचार के लिए केंद्र में ला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, भर्ती बच्चों की नियमित निगरानी और पोषण उपचार के चलते कई बच्चों की सेहत में सुधार देखने को मिल रहा है। उपचार पूरा होने के बाद बच्चों को स्वस्थ स्थिति में घर भेजा जा रहा है।kuposhan-2.jpg

अधिकारियों के निर्देश, डॉक्टरों की निगरानी में उपचार
खंड चिकित्सा अधिकारी गजानंद राठिया ने कुपोषित बच्चों के उपचार और निगरानी को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। वहीं डॉक्टर भगत की निगरानी में NRC में भर्ती बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि, धरमजयगढ़ जैसे वनांचल क्षेत्र में कुपोषण की चुनौती केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए गर्भवती महिलाओं का पोषण, समय पर स्वास्थ्य जांच, जागरूकता और दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।