नई दिल्ली। गोवा पुलिस की 9 जून 2025 की एफआईआर। मामला था महिला के 'डिजिटल अरेस्ट' का। 21 मई से 2 जून के बीच जालसाजों ने महिला को डरा-धमकाकर 'सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स' के नाम पर 2.60 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए। जब ईडी ने इस ठगी की तह तक जाने की कोशिश की, तो जो जाल सामने आया, उसने जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए होंगे। सिर्फ दो-ढाई करोड़ की ठगी का यह मामला देश भर में फैले 30 हजार करोड़ रुपए के साइबर मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क तक जा पहुंचा। मुंबई से फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद की गिरफ्तारी हुई है।

ठगों की फुर्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महिला से ठगे गए 2.60 करोड़ रुपए सिर्फ तीन घंटे के भीतर 400 से ज्यादा अलग-अलग बैंक खातों में टुकड़ों में बांट दिए गए। इतनी तेजी तो शायद शेयर बाजार में भी नहीं होती। जब इन खातों को खंगाला गया, तो ईडी को शेल और डमी कंपनियों का लंबा-चौड़ा मायाजाल मिला।

इन कंपनियों के 'निदेशक' कौन थे, यह जानकर हैरानी होगी। बड़े-बड़े ऑफिसों में बैठने वाले सूट-बूट वाले लोग नहीं, बल्कि गाड़ियां चलाने वाले ड्राइवर और छोटी-छोटी बस्तियों के सिंगल कमरों में रहने वाले मामूली कर्मचारी। इन लोगों से उनके दस्तावेज लिए गए, कागजों पर कंपनियां खड़ी की गईं और बैंक खाते खुलवाए गए। पर्दे के पीछे से इस पूरे तंत्र को शातिर दिमाग चला रहे थे, और कागजों पर करोड़पति बने बैठे थे वो लोग, जिन्हें शायद अपनी 'कंपनी' का नाम भी नहीं पता होगा।

इस सिंडिकेट ने रकम को ठिकाने लगाने के लिए ट्रेडिंग, ट्रैवल, कमोडिटी और फॉरेक्स कंपनियों का सहारा लिया। बैंकिंग ट्रांजेक्शन का आंकड़ा 27,850 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। कैश के खेल ने तो और भी चौंकाया। जांच में पता चला कि नेटवर्क वाली कंपनियों के खातों में 2,904 करोड़ रुपए तो सिर्फ नकद जमा कराए गए। बैंकों में लाइन लगाने से बचने के लिए बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीनों का बंपर इस्तेमाल हुआ। 584.70 करोड़ रुपए जमा करने के लिए इन मशीनों में 61,448 बार नोट डाले गए। मशीनें भी शायद सोचती होंगी कि इतना कैश आ कहां से रहा है।

यह कोई इकलौती घटना नहीं थी। 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 163 एफआईआर और करीब 300 साइबर ठगी की शिकायतों में इन्हीं कंपनियों के खातों का जिक्र मिला है। इन शिकायतों में ठगी के शिकार लोगों ने 417.49 करोड़ रुपए गंवाने की बात कही थी।

ठगी की कमाई देश में रखना खतरे से खाली नहीं था, इसलिए पैसा समंदर पार भेजा गया। मनी ट्रेल से खुलासा हुआ है कि ट्रैवल और फॉरेक्स कंपनियों की आड़ में करीब 1,950 करोड़ रुपए विदेश भेजे गए। इसमें से 1,200 करोड़ रुपए दुबई पहुंचे, 450 करोड़ रुपए थाईलैंड और 300 करोड़ रुपए सिंगापुर के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।