
रायपुर। राजधानी हो या दिगर जिले, ऐसा लगता है जैसे बदमाशों के हाथ में कानून की किताब की जगह सीधे चाकू पकड़ा दी गई है। अभी रविवार (23-24 अगस्त) की रात रायपुर के चंगोराभाठा इलाके में महज दो घंटे के भीतर दो युवकों की जान चली गई। पहली हत्या प्रेमिका को लेकर हुए बवाल के बाद वही दूसरी घटना बर्थडे पार्टी से लौटते वक्त।
पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए 9 लोगों को पकड़ लिया, जिनमें 4 नाबालिग हैं।
अगस्त का महीना पुलिस महकमे के लिए वैसे ही भारी पड़ रहा है, जहां हर दूसरे दिन राजधानी में कोई न कोई खून से होली खेल रहा है। वजह जान कर आप भी चौंक जाएंगे अंबिकापुर जिले के सुभाषनगर का हाल देखिए। 21 अगस्त को सिर्फ 70 रुपये उधार मांगने पर पिता-पुत्र ने मिलकर हर्षित और राहुल पटेल पर ऐसा हमला किया कि एक को 41 और दूसरे को 20 टांके लगे। इंसान की जान की कीमत अब 70 रुपये रह गई है।
उधर दुर्ग के जामुल में मोटरसाइकिल को लेकर हुई बहस में अरविंद चतुर्वेदी ने भीषम गायकवाड़ को चाकू से इतना गोदा कि अस्पताल में उसकी सांसें ही उखड़ गईं।
बिलासपुर में भी बदमाशों का भौकाल कम नहीं है। देवरीखुर्द शराब भट्ठी के पास ऑटो चालक की हत्या हो या फिर रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी का मर्डर, इन घटनाओं ने पुलिसिया गश्त की पोल खोल दी है। तिफरा के कुंदरापारा में तो प्रेम-प्रसंग के शक में फल वाले मनीष गोस्वामी को सरेआम चाकू मार दिया गया। पुलिस अब चाकूबाजों के ठिकानों पर दबिश दे रही है, लेकिन जब तक दबिश पूरी होती है, तब तक कोई नया मामला सामने आ जाता है।
प्रदेशभर में खून-खराबे का एक ही पैटर्न चल रहा है। रायगढ़ के पूंजीपथरा में शराबी को गाली देने से मना करना भारी पड़ गया और उसने ब्लेड से हमला कर दिया। जांजगीर-चांपा में तो लिफ्ट देकर मदद करने वाले 52 साल के राधेश्याम सूर्यवंशी की दो नाबालिगों ने जान ले ली, क्योंकि उसने लूट का विरोध किया था। राजनांदगांव में चार लड़कों ने मिलकर एक युवक को बुरी तरह घायल कर दिया, वहीं कोरबा में आशु चुटैल जैसे बदमाश सरेराह गुंडागर्दी कर रहे हैं।
भिलाई में फार्मेसी छात्रा खुशी साहू की उसकी पीजी में हत्या और सूरजपुर में महिला की गर्दन पर वार, ये घटनाएं दिखाती हैं कि एकतरफा आशिकी में सिरफिरे किस हद तक जा रहे हैं। प्रपोजल ठुकराने या किसी और से बात करने पर सीधे चाकू चल रहे हैं।
थानों में पुलिस हर दिन अपराधियों का जुलूस निकाल रही है, सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं। बदमाश पकड़े भी जा रहे हैं। पर बड़ा प्रश्न यह है कि सड़क पर घूमने वाले इन नए उम्र के लड़कों की जेबों में ये धारदार हथियार आखिर आ कहां से रहे हैं। घटना के बाद सायरन बजाती गाड़ियां मौके पर पहुंच जरूर रही हैं, पर तब तक सड़क पर बह चुका खून सूखने लगता है।
इधर बदले की भावना से कार्यवाही करने और असली आरोपियों को बचाने के आरोप भी पुलिस पर लग रहें हैं।