नई दिल्ली। दिल्ली में CJP के 'चलो संसद' मार्च के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। आज सुनवाई शुरू होते ही सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मेट्रो स्टेशन बंद होने से वकीलों, वादकारियों और अदालत के कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे न्यायिक कार्यवाही भी प्रभावित हो रही है।

CJI ने दिया स्पष्ट संदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि दोपहर (लंच ब्रेक) तक सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन नहीं खोला गया, तो अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करने पर विचार करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था के कारण न्यायालय की कार्यवाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

अनुपस्थित वकीलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं
सुनवाई के दौरान CJI ने यह भी कहा कि अगर मेट्रो बंद होने या यातायात संबंधी प्रतिबंधों के कारण कोई वकील या पक्षकार समय पर अदालत नहीं पहुंच पाता है, तो उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न पीठों से इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए मामलों की सुनवाई में व्यावहारिक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपेक्षा जताई।

सुरक्षा के चलते बंद किए गए थे कई स्टेशन
दिल्ली पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के तहत आज सुबह DMRC ने राजधानी के कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट अस्थायी रूप से बंद कर दिए थे। इनमें सुप्रीम कोर्ट, राजीव चौक, पटेल चौक, मंडी हाउस, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट समेत कई महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल बताए गए। इस फैसले का असर हजारों यात्रियों के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट आने वाले वकीलों और याचिकाकर्ताओं पर भी पड़ा, जिसके बाद यह मुद्दा सीधे सर्वोच्च अदालत के समक्ष उठाया गया।

अब सभी की नजर DMRC के अगले कदम पर
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद अब यह देखने पर नजरें टिकी हैं कि DMRC और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन को लेकर क्या निर्णय लेती हैं। यदि स्टेशन समय पर नहीं खुलता है, तो इस मामले में न्यायालय की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण हो सकती है।