
उप संचालक डॉ. गहवई के निलंबन से डॉक्टरों में उबाल, CIDA बोला – ये लड़ाई अब कोर्ट से सड़क तक लड़ी जाएगी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय चिकित्सक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के उप संचालक डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई को निलंबित किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (CIDA) में भारी आक्रोश है। एसोसिएशन ने इसे सीधे-सीधे बदले की कार्रवाई करार दिया है।
CIDA ने कहा – जिस डॉक्टर ने सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाई, उसी को सजा दे दी गई। डॉक्टरों के संगठन CIDA ने इस संबंध में प्रेसनोट जारी करते हुए कहा है कि डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई उन याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाएँ संचालनालय (DHS) के चिकित्सकीय कैडर से संबंधित एडिशनल डायरेक्टर जैसे प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय कैडर के अधिकारियों, विशेष रूप से एडिशनल कलेक्टर स्तर के अधिकारियों की पदस्थापना को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
चिकित्सकों पर दबाव बनाने का प्रयास
डॉ. गहवई उन डॉक्टरों में शामिल हैं, जिन्होंने DHS यानी स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में एडिशनल डायरेक्टर जैसे बड़े चिकित्सकीय पदों पर एडिशनल कलेक्टर स्तर के गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की नियुक्ति को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
CIDA का आरोप है – जिस समय हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है, ठीक उसी समय याचिकाकर्ता को ही निलंबित कर दिया गया। ये चिकित्सकों पर दबाव बनाने और उन्हें डराने की कोशिश है।
आदेश पर उठ रहे प्रश्न
निलंबन आदेश में कहा गया है कि डॉ. गहवई ने *सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 और 22(क)* का उल्लंघन किया, लेकिन *कब, कहां, कैसे उल्लंघन हुआ, इसका कोई जिक्र तक नहीं है।* CIDA ने इसी को आधार बनाकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
CIDA की दो टूक – अब आर-पार की लड़ाई
CIDA ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि चिकित्सकीय कैडर के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की जाती है, तो एसोसिएशन इसे गंभीरता से लेते हुए अपना रुख और अधिक सख्त करेगा। CIDA ने चिकित्सकीय कैडर के लिए निर्धारित पदों पर गैर-चिकित्सकीय कैडर के अधिकारियों की पदस्थापना के विरुद्ध अपनी न्यायिक लड़ाई को और अधिक व्यापक एवं तेज करने की बात कही है। इसमें चिकित्सकीय प्रशासनिक पदों पर संबंधित संवर्ग के अधिकारियों के अधिकार, वरिष्ठता, पात्रता एवं सेवा नियमों के पालन की मांग को पूरी मजबूती से उठाया जाएगा।
विवादित पदस्थापनाओं को लेकर कोर्ट में और भी दायर होंगी याचिकाएं
CIDA द्वारा बताया गया है कि RMA, जॉइंट डायरेक्टर तथा DHS से संबंधित विवादित पदस्थापनाओं एवं संवर्गीय अधिकारों के विषय में उच्च न्यायालय में अतिरिक्त याचिकाएँ प्रस्तुत करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इन मामलों में संबंधित नियुक्तियों की वैधानिकता एवं भर्ती नियमों के अनुपालन को न्यायिक परीक्षण के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
धरना-प्रदर्शन की तैयारी जल्द
CIDA ने कहा है कि अब लड़ाई केवल न्यायालय तक सीमित नहीं रहेगी। चिकित्सकीय कैडर के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रदेशव्यापी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन, धरना-प्रदर्शन तथा अन्य वैधानिक विरोध कार्यक्रमों की तैयारी भी जल्द शुरू हो जाएगी।
CIDA की ये हैं प्रमुख मांगें:
1) डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के निलंबन की परिस्थितियों एवं आधारों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए तथा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई पाए जाने पर निलंबन तत्काल निरस्त किया जाए।
2) न्यायालय में अपने वैधानिक अधिकारों के लिए याचिका प्रस्तुत करने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की प्रताड़ना अथवा दबाव की कार्रवाई न हो।
3) चिकित्सकीय कैडर के प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों में लागू भर्ती नियमों, संवर्गीय पात्रता एवं वरिष्ठता का पालन सुनिश्चित किया जाए।
4) चिकित्सकीय कैडर के पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की विवादित पदस्थापनाओं की वैधानिक समीक्षा की जाए।