
बिलासपुर : दशहरा पर्व आया भी नहीं है, लेकिन रावण दहन को लेकर जिले में विवाद शुरू हो गया है। पिछले कुछ वर्षो से विवादों में रहे साइंस कॉलेज मैदान में इस बार फिर दशहरा आयोजन को लेकर ऐसा पेंच फंसा है कि एक तरफ करीब 20 लाख रुपए का टेंडर, दूसरी तरफ नगर निगम की महापौर का साफ इनकार और बीच में अधिकारियों के अलग-अलग बयान सामने आ गए हैं। साइंस कॉलेज में रावण दहन के लिए आखिर 19.96 लाख रुपए का टेंडर किसके लिए और किसकी मंजूरी से निकला? यह स्पष्ट नहीं हैं।
19.96 लाख के टेंडर में खर्च का पूरा हिसाब
नगर निगम जोन क्रमांक-7 कार्यालय से साइंस कॉलेज मैदान में दशहरा महोत्सव के लिए 19.96 लाख रुपए की निविदा जारी होने की बात सामने आई है। टेंडर में अलग-अलग व्यवस्थाओं के लिए लाखों रुपए का प्रावधान किया गया है। टेंट, शामियाना और दर्शक बैठक व्यवस्था के लिए 9.96 लाख रुपए, रंग-बिरंगी आतिशबाजी के लिए 4 लाख रुपए और विशाल पुतला, लाइटिंग और साउंड सिस्टम के लिए 6 लाख रुपए। यानी एक ही आयोजन के लिए करीब 20 लाख रुपए की राशि प्रस्तावित होने से मामला सीधे सवालों के घेरे में आ गया है।
महापौर: निगम का जलेगा एक ही रावण
विवाद बढ़ते ही महापौर पूजा विधानी ने साइंस कॉलेज के आयोजन से नगर निगम को अलग बताया है। उनका कहना है कि नगर निगम का आधिकारिक दशहरा महोत्सव और रावण दहन पुलिस ग्राउंड में ही होगा। महापौर के अनुसार, साइंस कॉलेज में नगर निगम की ओर से आयोजन कराने की अनुमति नहीं दी गई है। जोन-7 से टेंडर जारी होने की जानकारी सामने आने के बाद उन्होंने जोन कमिश्नर को तलब कर निर्देश भी दिए। उनका स्पष्ट कहना है कि नगर निगम न तो साइंस कॉलेज के आयोजन की एजेंसी बनेगा और न ही इसमें उसकी कोई भूमिका होगी। निगम की ओर से रावण दहन पुलिस ग्राउंड में ही किया जाएगा।
20 लाख का टेंडर आखिर किसका?
अगर नगर निगम का साइंस कॉलेज के दशहरा आयोजन से कोई संबंध नहीं है, तो फिर जोन-7 कार्यालय से करीब 20 लाख रुपए का टेंडर आखिर किस आधार पर जारी हुआ? अब निगम के भीतर से लेकर शहर की राजनीति तक चर्चा का विषय बन गया है।
विपक्ष: एक जगह 10 लाख, दूसरी जगह 20 लाख क्यों?
विपक्षी नेताओं ने भी टेंडर को लेकर सवाल किया हैं। उनका कहना है कि नगर निगम वर्षो से पुलिस ग्राउंड में दशहरा आयोजन करता रहा है और इसके लिए करीब 10 लाख रुपए खर्च किए जाते हैं। ऐसे में साइंस कॉलेज मैदान में लगभग 20 लाख रुपए का खर्च प्रस्तावित करने का औचित्य क्या है? इतनी बड़ी राशि यदि वास्तव में खर्च होती है, तो इसका इस्तेमाल शहर की खराब सड़कों, नालियों और दूसरे जरूरी विकास कार्यों में किया जा सकता था। वहीं, विपक्ष की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि साइंस कॉलेज में वर्षों से अपने स्तर पर दशहरा आयोजन करने वाली अरपांचल दशहरा उत्सव समिति को दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अधिकारी बोले- कलेक्टर के निर्देश पर निकला टेंडर
मामले को लेकर जोन क्रमांक-7 के अधिकारी भूपेंद्र उपाध्याय ने अलग तस्वीर पेश की। उनका कहना है कि 28-29 सितंबर को कलेक्टर के सीधे निर्देश के बाद टेंडर जारी किया गया था और इस आयोजन का खर्च सीएसआर मद से वहन किया जाना तय हुआ है। अब यहीं से मामला और पेचीदा हो जाता है। एक तरफ महापौर कह रही हैं कि नगर निगम का साइंस कॉलेज आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है, दूसरी तरफ जोन अधिकारी टेंडर को कलेक्टर के निर्देश से जारी होना बता रहे हैं।
आयुक्त : पूरी जानकारी जुटा रहा हूं
जब नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे से इस टेंडर को लेकर कहा कि टेंडर जोन स्तर से जारी हुआ है और वे इसकी पूरी जानकारी जुटा रहे हैं। यानी एक ही टेंडर को लेकर महापौर का इनकार, जोन अधिकारी का अलग दावा और आयुक्त की अनभिज्ञता, तीनों बातें सामने आने के बाद प्रशासनिक समन्वय पर संदेह है।