दुर्ग: दुर्ग जिले में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ हुई कार्रवाई ने साइबर अपराध और अवैध वित्तीय नेटवर्क के एक चिंताजनक चेहरे को उजागर कर दिया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जो कथित तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर ऑनलाइन सट्टे के पैसों का लेन-देन कर रहा था। मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसे नेटवर्क इतने लंबे समय तक बिना किसी रोक-टोक के कैसे संचालित होते रहे।

जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और फिर उनसे जुड़े एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम कार्ड व अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में रख लेते थे। इन्हीं खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े पैसों को इधर-उधर करने और असली संचालकों की पहचान छिपाने के लिए किया जाता था। पुलिस को आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल उपकरण मिले हैं, जो नेटवर्क के बड़े दायरे की ओर इशारा कर रहे हैं।whatsapp-image-2026-06-22-at-124037-pm_1782113684

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी खुलेआम सार्वजनिक स्थान पर बैठकर कथित तौर पर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। पुलिस की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि ऑनलाइन बेटिंग ऐप के जरिए यह गतिविधियां राज्य की सीमाओं से बाहर तक फैली हुई थीं और इसका संचालन दूसरे राज्यों से भी जुड़ा हुआ था। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि मामला सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हो सकता।whatsapp-image-2026-06-22-at-124038-pm_1782113733

फिलहाल, पुलिस जब्त किए गए मोबाइल, बैंक खातों, सिम कार्ड और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। लेकिन इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और म्यूल अकाउंट जैसे नेटवर्क युवाओं और गरीब तबके को किस तरह अपने जाल में फंसा रहे हैं। यदि समय रहते ऐसे संगठित नेटवर्क पर अंकुश नहीं लगाया गया तो साइबर अपराध और अवैध आर्थिक गतिविधियों का दायरा और बढ़ सकता है।