बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के महासमुंद स्थित सरकारी बाल संप्रेषण गृह से दुष्कर्म सहित विभिन्न मामलों में निरुद्ध आठ किशोरों के फरार होने की घटना को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अत्यंत गंभीरता से लिया है । मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस मामले को जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर लिया है ।

कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए फरार किशोरों की तलाश, बाल संप्रेषण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी है । मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की गई है ।

ग्रिल तोड़ी, कांटेदार तार काटकर हुए फरार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महासमुंद के सरकारी बाल संप्रेषण गृह में निरुद्ध आठ किशोर तड़के खिड़की की लोहे की ग्रिल तोड़कर बाहर निकले । इसके बाद उन्होंने करीब 12 फीट ऊंची बाहरी दीवार पर लगे कांटेदार तार को काटा और वहां से फरार हो गए । इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है । फरार हुए किशोरों में एक दुष्कर्म के मामले, दो चोरी के मामलों, तीन आबकारी अधिनियम और दो एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामलों में निरुद्ध थे ।

सुरक्षा व्यवस्था पर हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

डिवीजन बेंच ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि खिड़की की ग्रिल तोड़ने और ऊंची दीवार पर लगे कांटेदार तार काटने जैसी गतिविधियों के बावजूद सुरक्षा कर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगी । कोर्ट ने माना कि यह केवल एक संस्थान की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र की विफलता का संकेत है । कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य के अन्य किशोर न्याय गृहों से भी पूर्व में किशोरों के फरार होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं । ऐसे में यह मामला किसी एक घटना तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूरे तंत्र की समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है ।

जेजे एक्ट के उद्देश्य पर उठे सवाल

हाई कोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित, संरक्षित और सुधारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना है । यदि ऐसे संस्थानों से किशोर लगातार फरार हो रहे हैं, तो यह न केवल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है बल्कि कानून के मूल उद्देश्य और आम जनता की सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है ।

मुख्य सचिव को देना होगा विस्तृत जवाब

हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं । इसमें फरार किशोरों की तलाश के लिए अब तक उठाए गए कदम, उन्हें पकड़ने के लिए पड़ोसी जिलों एवं ओडिशा राज्य को किस प्रकार अलर्ट किया गया, प्रदेश के सभी बाल संप्रेषण गृहों की वर्तमान सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रस्तावित सुधारात्मक कदम, जेजे एक्ट, 2015 के अनुरूप संस्थानों के प्रबंधन एवं सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कार्ययोजना पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करनी होगी l  

11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को तय की है । माना जा रहा है कि मुख्य सचिव के हलफनामे के आधार पर हाई कोर्ट राज्य के सभी बाल संप्रेषण गृहों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी कर सकती है । फिलहाल इस मामले ने राज्य के किशोर न्याय संस्थानों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं ।