
बिलासपुर : एक नोटिस वापस आया, उसके बाद अखबार में इश्तहार प्रकाशित कराया गया और पत्नी के सामने आए बिना ही एकतरफा तलाक की डिक्री पारित कर दी गई। जस्टिस पी. पी. साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट की कार्रवाई को गलत ठहराते हुए संबंधित आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी पक्ष को सुनवाई का वास्तविक अवसर दिए बिना उसके खिलाफ आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
एक नोटिस लौटा और सीधे अखबार में छप गया इश्तहार
मामला सूरजपुर निवासी दंपती के तलाक से जुड़ा है। पति ने 9 जनवरी 2024 को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी। पत्नी के दिए पते पर पंजीकृत डाक से नोटिस भेजा गया, लेकिन पता सही नहीं होने के कारण नोटिस वापस लौट आया। इसके बाद पति ने अखबार में नोटिस प्रकाशित कराने की मांग की, जिसे फैमिली कोर्ट ने मंजूरी दे दी। 29 फरवरी 2024 को स्थानीय अखबार में नोटिस प्रकाशित हुआ। इसके बाद पत्नी के कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर 2 अप्रैल 2024 को उसे एकतरफा कर दिया गया और महज कुछ ही दिनों बाद 25 अप्रैल को फैमिली कोर्ट ने तलाक की डिक्री पारित कर दी।
काउंसलिंग में खुला राज, पत्नी थी तलाक से अंजान
यहीं से मामला हाईकोर्ट पहुंचा। पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उसे तलाक की पूरी कार्यवाही की जानकारी ही नहीं थी। उसे 18 नवंबर 2024 को औरंगाबाद में चल रहे भरण-पोषण के मामले की काउंसलिंग के दौरान तलाक की डिक्री की कॉपी दिखाई गई। इसके बाद उसने प्रमाणित प्रति हासिल की और 2 दिसंबर 2024 को एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने की अर्जी दाखिल की। देरी के लिए माफी भी मांगी। हाईकोर्ट ने देरी माफ करते हुए मामले की प्रक्रिया की जांच की तो फैमिली कोर्ट की कार्रवाई में महत्वपूर्ण कमी सामने आई। डिवीजन बेंच ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 के नियम 17 और 20 का हवाला देते हुए कहा कि नोटिस एक बार वापस आने के बाद सीधे अखबार में प्रकाशित कराना उचित नहीं था।
घर पर नोटिस चस्पा किए बिना अखबार में प्रकाशन, हाईकोर्ट ने जताई आपत्ति
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रयास नहीं दिखता, जिससे यह साबित हो कि पत्नी के घर पर नोटिस चस्पा कराया गया था। इसके बावजूद यह मान लिया गया कि पत्नी जानबूझकर नोटिस से बच रही है। जबकि रिकॉर्ड में ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त आधार ही नहीं था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अखबार में नोटिस प्रकाशित करना अंतिम उपाय है। उससे पहले नोटिस देने और जरूरत पड़ने पर घर पर चस्पा करने की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। बिना पूरी प्रक्रिया अपनाए किसी पक्ष को एकतरफा कर देना और फिर तलाक की डिक्री पारित कर देना न्यायसंगत नहीं है।
फिर से होगी सुनवाई, 12 अक्टूबर को दोनों पक्षों को बुलाया
डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के संबंधित आदेश को रद्द करते हुए मामले को नए सिरे से सुनने का निर्देश दिया है। साथ ही दोनों पक्षों को 12 अक्टूबर 2026 को फैमिली कोर्ट में उपस्थित होने कहा गया है। अब पत्नी की एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने की अर्जी पर फैमिली कोर्ट नए सिरे से फैसला करेगा।