
नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और गैस सप्लाई संकट के बीच Tata Steel ने उत्पादन बनाए रखने के लिए एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। जमशेदपुर स्थित प्लांट्स में कंपनी ने पारंपरिक एलपीजी और प्रोपेन गैस पर निर्भरता कम करते हुए हाइड्रोजन-नाइट्रोजन (HNX) मिश्रण का सफल उपयोग शुरू किया है। इस पहल को उद्योग जगत में एक स्मार्ट और टिकाऊ समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, Jamshedpur स्थित इकाइयों पर वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं का असर पड़ा, जिसके चलते एलपीजी और प्रोपेन जैसी गैसों की उपलब्धता प्रभावित हुई। इस स्थिति में उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए कंपनी ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से काम शुरू किया और कम समय में HNX तकनीक को लागू कर दिया।
कंपनी के डाउनस्ट्रीम डिवीजन के चार प्रमुख प्लांट CRM बारा, ट्यूब्स, टिनप्लेट और वायर डिवीजन में इस नई प्रणाली को लागू किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, पहले जहां ये प्लांट पारंपरिक ईंधन पर चलते थे, वहीं अब हाइड्रोजन और नाइट्रोजन के संयोजन से उत्पादन प्रक्रिया को स्थिर रखा जा रहा है। इसके लिए प्लांट शटडाउन को पहले ही एडवांस में लेकर जरूरी तकनीकी अपग्रेड भी किए गए है।
इस इनोवेशन का एक बड़ा फायदा पर्यावरण के लिहाज से भी सामने आ रहा है। नई तकनीक के इस्तेमाल से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। साथ ही, स्टील उत्पादन के दौरान ऑक्सीकरण को रोकने और उसकी गुणवत्ता व चमक बनाए रखने में भी यह मिश्रण कारगर साबित हो रहा है। यह कदम कंपनी के 2045 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संकट के बीच इस तरह के तकनीकी समाधान भविष्य के औद्योगिक मॉडल को परिभाषित कर सकते हैं। Tata Steel का यह प्रयोग न केवल उत्पादन को सुरक्षित रखने में मददगार है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि भारतीय उद्योग तेजी से ग्रीन और आत्मनिर्भर टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ रहा है।