नई दिल्ली: पिछले डेढ़ महीने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा संयंत्रों में आग लगने की घटनाओं ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। भारत सहित कम से कम पांच देशों में इस तरह की घटनाएं सामने आने के बाद विशेषज्ञ इसे महज संयोग मानने को तैयार नहीं हैं। खासतौर पर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते तेल और गैस की आपूर्ति पहले ही संवेदनशील बनी हुई है।

भारत में हालिया घटना राजस्थान के पचपदरा स्थित एचपीसीएल-राजस्थान रिफाइनरी में सामने आई, जहां उद्घाटन से ठीक पहले प्रोसेसिंग यूनिट में आग लग गई। इस परियोजना का उद्घाटन नरेन्द्र मोदी द्वारा किया जाना प्रस्तावित था। इसके अलावा, मुंबई तट के पास ओएनजीसी के एक तेल क्षेत्र में भी आग की घटना ने चिंता बढ़ा दी है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। इक्वाडोर, मैक्सिको, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में रिफाइनरियों और ईंधन संयंत्रों में आग और विस्फोट की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकांश मामलों में आधिकारिक तौर पर तकनीकी खराबी को वजह बताया गया है, लेकिन घटनाओं का समय और पैटर्न कई सवाल खड़े कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन घटनाओं के पीछे कोई संगठित रणनीति है, तो इसका उद्देश्य वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता को प्रभावित कर कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर ले जाना हो सकता है। खासकर तब, जब होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर तनाव बढ़ा हुआ है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच इन घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल, सभी देश इन हादसों को अलग-अलग घटनाएं मानकर जांच कर रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में इनका वास्तविक कारण सामने आना वैश्विक बाजार और राजनीति दोनों के लिए अहम साबित हो सकता है।