
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी आग ने ऐसा खौफनाक मंजर पैदा किया, जिसमें कई यात्रियों को अपनी जान बचाने के लिए चंद पलों में फैसला लेना पड़ा। हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई। बस से बाहर निकलकर जान बचाने वाले यात्रियों की आपबीती उस भयावह स्थिति को बयां करती है, जब चारों ओर धुआं, चीख-पुकार और भगदड़ के बीच बाहर निकलने का रास्ता तलाशना मुश्किल हो गया था।
कुछ यात्री गहरी नींद में थे, तो कुछ को बस के भीतर जलने की गंध महसूस हो रही थी। आग फैलने के बाद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। किसी ने सामान छोड़ दिया, तो कोई जूते पहने बिना ही बाहर भागा। हादसे के बाद सामने आए FIR के विवरण और यात्रियों के बयान अब बस में आग लगने से पहले के हालात पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
‘कुछ दिखाई नहीं दे रहा था…’ धुएं में घिरी बस से निकलने की जद्दोजहद
फोन लेकर बाहर निकली महिला, सामान और जूते तक छूटे
एक महिला यात्री ने बताया कि वह बस में सो रही थी, तभी दरवाजा खटखटाकर उसे जगाया गया। आंख खुलते ही उसने बस के भीतर अफरा-तफरी देखी। हालात इतने बिगड़ चुके थे कि वह अपना सामान तक नहीं उठा पाई और बिना जूते पहने सिर्फ फोन लेकर बाहर निकलने की कोशिश करने लगी।
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