रायपुर के गोढ़ी में 4 हजार क्षमता की नई जेल का प्रस्ताव, अब 13 जून 2026 को कोर्ट लेगा प्रोग्रेस रिपोर्ट

 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में अब कैदियों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस कर नहीं रखा जाएगा। क्षमता से ज्यादा कैदियों का भारी बोझ झेल रही प्रदेश की जेलों की व्यवस्थाएं जल्द ही पूरी तरह से हाईटेक और मानवीय होने जा रही हैं। बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच (डीबी) की लगातार सख्ती के बाद अब राज्य का जेल प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। मंगलवार को जेलों की अव्यवस्था और ओवरक्राउडिंग (क्षमता से अधिक भीड़) मामले में हुई अहम सुनवाई में जेल विभाग ने साफ किया है कि प्रदेश में 'मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016' को बेहद कड़ाई के साथ लागू किया जा रहा है।

बेमेतरा में ओपन जेल, बिलासपुर में मॉडल प्रिजन का निर्माण

जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की दमघोंटू भीड़ को कम करने के लिए बेमेतरा में 200 कैदियों की क्षमता वाली एक नई और सर्वसुविधायुक्त 'ओपन जेल' (खुली जेल) लगभग बनकर तैयार हो गई है। यह जेल पूरी तरह से आधुनिक मानकों पर आधारित है। वहीं, दूसरी ओर बिलासपुर के बैमा नगोई में एक अत्याधुनिक मॉडल जेल का निर्माण किया जा रहा है। डायरेक्टर जनरल (जेल और सुधार सेवाएं, नवा रायपुर) ने मंगलवार को हाईकोर्ट में अपना व्यक्तिगत शपथपत्र पेश किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बैमा नगोई की जेल को 'मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016' के दिशा-निर्देशों से भी एक कदम आगे बढ़कर सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है।

अफसरों को दो टूक- निर्देशों का हो शत-प्रतिशत पालन

जेल मुख्यालय की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि राज्यभर की जेलों में तत्काल सुधार के लिए कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के इंजीनियर इन चीफ, जेल विभाग के डीआईजी और सभी सेंट्रल जेलों के अधीक्षकों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि जेलों के निर्माण, रखरखाव और संचालन में मैनुअल 2016 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

रायपुर के गोढ़ी में बनेगी 4000 कैदियों की मेगा जेल

जेलों से भीड़भाड़ पूरी तरह खत्म करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए रायपुर जिले के गोढ़ी गांव में एक विशाल जेल बनाने का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। शुरुआत में 1000 और फिर 4000 कैदियों की क्षमता वाली इस मेगा जेल के निर्माण के लिए राज्य सरकार से जरूरी बातचीत और पत्राचार जारी है। इसके अलावा, कोर्ट को यह भी अवगत कराया गया है कि मैनुअल के स्पेसिफिकेशन्स को ध्यान में रखते हुए अब तक करीब 4000 बंदियों को रिहा करने जैसी अहम प्रक्रियाएं भी अपनाई गई हैं।

अब 13 जून को कोर्ट लेगा विस्तृत प्रोग्रेस रिपोर्ट

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने जेल प्रशासन के अब तक के कदमों को रिकॉर्ड पर लेते हुए इस मामले को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ क्लब कर दिया है। अदालत ने संबंधित अथॉरिटी को सख्त निर्देश दिया है कि वे मामले में आगे की विस्तृत प्रोग्रेस रिपोर्ट एक नए शपथपत्र के माध्यम से अगली सुनवाई से पहले कोर्ट में पेश करें। इस पूरे मामले की आगे की सघन मॉनिटरिंग के लिए हाईकोर्ट ने अगली तारीख 13 जून 2026 निर्धारित की है।