बिलासपुर। Jaggi Murder Case: छत्तीसगढ़ के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड ने एक बार फिर कानूनी गलियारों में हलचल तेज कर दी है, जहां हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। वर्षों पुराने इस हाई-प्रोफाइल केस में अदालत ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि अब फैसला टालने की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

बिलासपुर हाईकोर्ट में हुई ताजा सुनवाई के दौरान अमित जोगी की ओर से अतिरिक्त समय की मांग की गई, लेकिन कोर्ट ने इसे सख्ती से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मामले को अब और लंबा नहीं खींचा जाएगा। डिवीजन बेंच ने अगली तारीख तय करते हुए कहा कि कल अंतिम सुनवाई होगी, जिसके बाद फैसला आने की उम्मीद तेज हो गई है।

दरअसल, यह मामला साल 2003 में हुए सनसनीखेज हत्याकांड से जुड़ा है, जब एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश की राजनीति और कानून व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया था। जांच के बाद 2007 में ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

इस फैसले को चुनौती देते हुए मृतक के परिजनों ने न्याय की लड़ाई जारी रखी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट से होते हुए हाईकोर्ट पहुंचा। अब इस केस में अंतिम बहस पूरी होने के कगार पर है और न्यायालय के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

हत्याकांड से जुड़ी पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रही है। राम अवतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे और छत्तीसगढ़ में एनसीपी के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। ऐसे में यह केस केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव वाला मामला भी माना जाता रहा है।

इसी बीच अंतिम सुनवाई से पहले अमित जोगी को निचली अदालत से जमानत मिलना भी इस केस में नई चर्चा का विषय बन गया है। 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर मिली यह राहत अब अंतिम फैसले से पहले एक अहम कानूनी मोड़ के रूप में देखी जा रही है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो न केवल इस लंबे कानूनी संघर्ष का अंत करेगा, बल्कि राज्य की न्यायिक और राजनीतिक दिशा पर भी असर डाल सकता है।