रायपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग (WRD) में भ्रष्टाचार अब किसी फाइल, ठेके या बाबू तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने बाकायदा एक मल्टीनेशनल कंपनी का रूप ले लिया है। चौंकिए मत! विभाग में बकायदा एक वसूली सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसे संस्थागत रूप दे दिया गया है। इस 'खुले खेल' की भनक अब सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गई है। PMO को भेजी गई एक बेहद गोपनीय और विस्तृत शिकायत ने इस पूरे वसूली तंत्र के ढांचे को बेनकाब कर दिया है। शिकायत में बताया गया है कि कैसे प्रशासनिक नियंत्रण की आड़ में धन उगाही का एक विकेंद्रीकृत  मॉडल चलाया जा रहा है।

संभागवार बंटे हैं टारगेट, चीफ इंजीनियर बने रीजनल मैनेजर  

नक्सल प्रभावित इलाकों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक, हर जगह से 'माल' बटोरने के लिए बाकायदा संभागवार जिम्मेदारियां तय की गई हैं। अधिकारियों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों का जिम्मा सौंपा गया है। शिकायत के मुताबिक, मुख्य अभियंताओं (CE) और अधीक्षण अभियंताओं को उनके इलाके बांट दिए गए हैं:
 मक्सी कुजूर (मुख्य अभियंता, महानदी परियोजना एवं महानदी-गोदावरी कछार): इनके जिम्मे वसूली का सबसे बड़ा इलाका है। राजधानी रायपुर से लेकर दुर्ग, राजनांदगांव, बालोद, धमतरी, महासमुंद और गरियाबंद तक के एक दर्जन से अधिक संभागों से कलेक्शन का टारगेट इन्हें दिया गया है।
 शंकर राव सोनाने (मुख्य अभियंता, हसदेव बांगो परियोजना बिलासपुर): इन्हें औद्योगिक पट्टी का जिम्मा मिला है। खरसिया, रायगढ़, सक्ती और कोरबा जैसे महत्वपूर्ण और भारी बजट वाले संभाग इनके खाते में हैं।
 जितेंद्र नेताम (मुख्य अभियंता, हसदेव कछार बिलासपुर):मुंगेली, जांजगीर-चांपा और पेंड्रा रोड के इलाकों से उगाही का प्रभार सीधे तौर पर इनके पास बताया जा रहा है।

बस्तर से सरगुजा तक बिछा है नेटवर्क
कलेक्शन का यह सिंडिकेट केवल मध्य छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर से दक्षिण तक इसका जाल पूरी तरह से बिछा हुआ है।
 अनिल खलखो (मुख्य अभियंता, हसदेवगंगा कछार अंबिकापुर):इन्हें सरगुजा संभाग के सभी जिलों का जिम्मा सौंपा गया है।
 
एलेक्जेंडर ग्राहम (मुख्य अभियंता, गोदावरी कछार जगदलपुर):
 बस्तर संभाग के अति-संवेदनशील जिलों जैसे दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर का कलेक्शन टारगेट इनके जिम्मे है।

दो अफसरों के पास है मास्टर चाबी
इस पूरे सिंडिकेट में कलेक्शन एजेंटों की भूमिका सबसे अहम है। सूत्र बताते हैं कि इस पूरी व्यवस्था के मुख्य सूत्रधार महानदी परियोजना मंडल के अधीक्षण अभियंता संतोष साहू और रायपुर के विद्युत-यांत्रिकीय अधीक्षण अभियंता प्रणव पाल हैं। नीचे के स्तर से पैसा इकट्ठा कर ऊपर बैठे आकाओं तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी 'चेन' इन्हीं दोनों के इशारे पर चल रही है। ये दोनों अफसर इस कॉरपोरेट भ्रष्टाचार के अहम माध्यम के रूप में काम कर रहे हैं।

मैदानी अमले में घुटन और खौफ
ऊपर से थोपे गए इस भारी-भरकम कलेक्शन टारगेट और सिंडिकेट के दबाव के कारण विभाग का पूरा मैदानी अमला (Field Staff) जबरदस्त घुटन महसूस कर रहा है। काम के बजाय सिर्फ उगाही का टारगेट पूरा करने के दबाव ने कर्मचारियों का मनोबल तोड़ दिया है। अब जब यह पूरी गोपनीय सूची और काम करने का तरीका PMO की टेबल पर पहुंच चुका है, तो विभाग में हड़कंप मचना तय माना जा रहा है।