
जगदलपुर के कार्यपालन अभियंता के 42 लाख के मेडिकल प्रतिपूर्ति बिल मामले में कार्रवाई शून्य।
रायपुर। जल संसाधन विभाग में संविदा पर जमे अधीक्षण अभियंता (प्रशासन) की मनमानी जोरो पर है। बता दें कि सेवानिवृत्ति के बाद पिछले 4 वर्षों से लगातार अधीक्षण अभियंता (प्रशासन) के पद पर संविदा में जमे प्रसून शर्मा अपनी मनमर्जी से कार्य कर रहे हैं। राज्य शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि संविदा अधिकारी या कर्मचारी शासकीय सेवक की श्रेणी में नहीं आता है। नियमानुसार एवं हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार किसी भी संविदा में पदस्थ व्यक्ति को वित्तीय एवं प्रशासनिक पद पर बैठने का अधिकार ही नहीं है। परंतु यह व्यक्ति लेनदेन कर प्रशासनिक पद पर शोभायमान हो रहा है और मनमर्जी कर रहा है। अधिकारी अपनी पेंशन के अतिरिक्त डेढ़ लाख रुपए प्रतिमाह का भारी भरकम वेतन ले रहा है।
नियम विरुद्ध शर्त जोड़कर नियमितीकरण रोका
जल संसाधन विभाग में उप अभियंता एवं सहायक अभियंताओं की नियुक्ति वर्ष 2003 में की गई थी। इन पदों पर नियुक्ति के दौरान 3 वर्ष के प्रोबेशन की शर्त रखी गई थी। व्यवस्था थी कि सफलतम प्रोबेशन के पश्चात उन्हें नियमित सेवा में पद स्थापित किया जाना था। इनके नियुक्ति आदेश में यही शर्त थी परंतु अधीक्षण अभियंता प्रशासन ने इन्हें नियमित करने से इनकार कर दिया है। अधिकारी ने यह शर्त अपने मन से जोड़ दी है कि वह विभागीय परीक्षा पास करेंगे तभी इन्हें नियमित किया जावेगा।
विशेष यह है कि विगत चार वर्षो से विभाग में कोई विभागीय परीक्षा हुई ही नहीं है। जब परीक्षा हुई ही नहीं है तो फिर प्रोबेशन के अन्य अधिकारियों पर अधीक्षण अभियंता (प्रशासन) प्रसून शर्मा किस हक से यह कह रहे हैं कि इन्हें नियमित नहीं किया जाएगा। इस रवैये से स्पष्ट हो रहा है कि अधीक्षण अभियंता प्रशासन की मंशा कुछ और ही है।
शिकायतों की फाइलें कार्यालय में खा रहीं धूल
अधीक्षक अभियंता प्रशासन ने अपने संविदा के कार्यकाल में भारी लूट मचा कर रखी है। यदि कोई शिकायत आती है तो उसे नीचे जांच करने के लिए भेज देते हैं। वह फाइल वर्षों तक धूल खाते हुए पड़े रहती है और यह न जाने क्या करते रहते हैं।
जगदलपुर कार्यपालन अभियंता का 42 लाख का मामला
विदित हो कि जगदलपुर के कार्यपालन अभियंता ने अपने पेंशनर माता-पिता के नाम से 42 लाख का मेडिकल प्रतिपूर्ति बिल आहरण कर लिया। यह आहरण सर्वथा नियम विरुद्ध है। जिसकी शिकायत इसी साल फरवरी 2026 में की गई थी। लेकिन प्रमाणित दस्तावेजों के बावजूद भी मामले को ठंडा बस्ती में डाल दिया गया, आरोप है कि फर्जी मेडिकल बिल घोटाले के आरोपी कार्यपालन अभियंता को बचाने शर्मा ने बड़ी डील की