स्वाती मिश्रा पाण्डेय 

मिशन वात्सल्य योजना के तहत 2022 से संचालित है योजना, 2 वर्ष पूर्व आवेदन करने वाले कई हितग्राही अब भी कर रहे सहायता का इंतजार

बिलासपुर : महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए छत्तीसगढ़ सरकार समय-समय पर कई योजनाएं शुरू करती हैं, लेकिन  इन योजनाओं का वास्तविक लाभ कितने पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है, यह सवाल बना हुआ है। सरकारी स्तर पर योजनाओं की समीक्षा और मॉनिटरिंग की कमी के कारण कई लाभार्थी वर्षों तक सहायता से वंचित हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला महिला एवं बाल विकास विभाग की मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत संचालित स्पॉन्सरशिप योजना में सामने आया है ।

वर्ष 2022 से संचालित इस योजना का उद्देश्य संकटग्रस्त, अनाथ और बेसहारा बच्चों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें परिवार के साथ सुरक्षित वातावरण में पालन-पोषण उपलब्ध कराना है। हालांकि विभागीय आंकड़े बताते हैं कि अब तक केवल 14.47 प्रतिशत पात्र बच्चों को ही इस योजना का लाभ मिल पाया है । बड़ी संख्या में ऐसे हितग्राही भी हैं, जिन्होंने लगभग दो वर्ष पूर्व आवेदन और पंजीयन कराया था, लेकिन आज तक उन्हें योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी है।

क्या हैं स्पॉन्सरशिप योजना ?

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत 'स्पॉन्सरशिप योजना' जरूरतमंद बच्चों के लिए आर्थिक सहयोग का माध्यम है। इसके तहत ऐसे बच्चे जो अनाथ हैं, एकल अभिभावक के बच्चे जिनकी वार्षिक आय 72 हजार (ग्रामीण) एवं 92 हजार (शहरी) हैं, परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है या बेघर होने की स्थिति में हैं या जिनके अभिभावक किसी गंभीर बिमारी से पीड़ित हो, उन्हें प्रतिमाह 4,000 रुपये की सहायता राशि सीधे बैंक खाते में प्रदान की जाती है । यह आर्थिक सहायता बच्चे के 18 वर्ष की आयु तक दिए जाने का प्रावधान है, ताकि उसकी शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक जरूरतें पूरी हो सकें ।

परिवार से जोड़कर रखने पर जोर

'स्पॉन्सरशिप योजना' का उद्देश्य बच्चों को संस्थागत देखभाल यानी अनाथालय भेजने के बजाय उनके परिवार या रिश्तेदारों के साथ ही सुरक्षित वातावरण में रखना है । योजना के माध्यम से अनाथ, बेसहारा, परित्यक्त, एकल माता-पिता वाले अथवा गंभीर सामाजिक एवं आर्थिक संकट से जूझ रहे बच्चों को वित्तीय सहायता देकर उनके पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी निभाने में परिवार की मदद की जाती है। इससे बच्चों का मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास भी बेहतर तरीके से हो सके ।

हितग्राहियों की चयन प्रक्रिया

योजना के तहत पात्र बच्चों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है। प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में 'स्पॉन्सरशिप एंड फोस्टर केयर अप्रूवल कमेटी' गठित की जाती है । यह समिति बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की अनुशंसा के आधार पर प्राप्त मामलों की समीक्षा करती है और पात्र बच्चों को सहायता स्वीकृत करती है। जिला प्रशासन के नेतृत्व में इस योजना को प्रभावशाली रूप से लागू करने के लिए कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला कार्यक्रम अधिकारी व महिला एवं बाल विकास अधिकारी की निर्देशन में जरुरतमंदों को चिन्हांकित किया जाता हैं और उन्हें योजना में शामिल किया जाता हैं । पूरी प्रक्रिया किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम तथा उसके नियमों के अनुरूप संचालित की जाती है।

वर्ष 2022 से जून 2026 तक आंकडे एक नज़र में 

क्र.

   वित्तीय वर्ष

    कुल प्राप्त आवेदन

कुल लाभान्वित आवेदन

1

      2022-23

              3

            3

2

      2023-24

              52

           44

3

      2024-25

              343

           0

4

      2025-26

              376

           65

 

कुल

              774

           112

 

आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और संकटग्रस्त बच्चों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े इसके विपरीत तस्वीर पेश कर रहे हैं। वर्ष 2022 से अब तक केवल 14.47 प्रतिशत पात्र हितग्राहियों को ही योजना का लाभ मिल सका है। इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में पात्र बच्चे अब भी सरकारी सहायता से वंचित हैं।

स्थिति यह है कि दो-तीन वर्ष पहले आवेदन करने वाले कई हितग्राही आज भी सहायता राशि मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में योजना की धीमी प्रक्रिया और क्रियान्वयन व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं l

धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता

मिशन वात्सल्य जैसी योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब पात्र बच्चों की समय पर पहचान, आवेदन का शीघ्र परीक्षण और सहायता राशि का नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए । यदि स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया में लगातार देरी होती रही तो योजना का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित होगा और जरूरतमंद बच्चों तक सरकारी सहायता समय पर नहीं पहुंच पाएगी ।

महिला एवं बाल विकास विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लंबित आवेदनों का शीघ्र निराकरण किया जाए, पात्र बच्चों को समय पर लाभ मिले और योजना का दायरा बढ़ाकर अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित की जाए।

2023 में दिया आवेदन, अब तक नहीं मिला लाभ  

आवेदिका प्रमिला बाई गोंड ने बताया कि 2019 में बीमारी के कारण पति का देहांत हो गया था l दो बच्चो की परवरिश की जिम्मेदारी आवेदिका पर आ गई हैं l आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चो को अच्छी शिक्षा देना कठिन हो रहा हैं l एक एनजीओ के माध्यम से स्पॉन्सरशिप योजना की जानकारी हुई थी, तब 2023 में आवेदन दिया था l विभाग ने घर आकर सभी जानकरी भी ली थी l 3 साल हो गये, इसके बाद भी आज तक एक भी राशि नहीं मिली, जबकि पात्रता सूची में नाम भी l

जब राज्य स्तर से राशि होगी स्वीकृत, तब होगा आबंटित

महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश सिंह ने कहा कि 2022 से अब 774 आवेदन आये हैं, इसमें लगभग 500 हितग्राही पात्र हैं l शासन को पात्र हितग्राहियों की पूरी सूची भेज दी गई हैं l राज्य स्तर पर जितनी राशि स्वीकृत होती हैं, उसके अनुसार राशि आबंटित कर दी जाती l आगे जैसे-जैसे राशि स्वीकृत होगी, सूची के अनुसार खाते में भेज दी जाएगी l