धमतरी। देशभर में जहां इस साल 8 नवंबर 2026 को दीपावली का त्योहार मनाने की तैयारियां चल रही हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का एक गांव ऐसा भी है, जहां दिवाली निर्धारित तिथि से करीब एक सप्ताह पहले ही मनाई जाती है। यहां के ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी परंपरा को निभाते हुए आज ही दीपावली का पर्व मनाया। गांव के घरों में रंग-बिरंगी रंगोलियां सजाई गईं, आकर्षक झालरों से मकान रोशन किए गए और दीपावली की खुशियां मनाई गईं। इस अनोखी परंपरा के पीछे सिरदार देव से जुड़ी एक धार्मिक मान्यता है, जिसका पालन ग्रामीण पीढ़ियों से करते आ रहे हैं।

धमतरी से 30 किलोमीटर दूर है अनोखा सेमरा गांव

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित सेमरा गांव अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां दीपावली समेत कुछ प्रमुख त्योहार निर्धारित तिथि से एक सप्ताह पहले मनाए जाते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि गांव में त्योहार समय से पहले नहीं मनाया गया तो कोई अनहोनी हो सकती है। इसी मान्यता के चलते गांव के लोग परंपरा का पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पालन करते हैं।

दीपावली के अवसर पर गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। घरों की साफ-सफाई और सजावट के साथ महिलाओं और बच्चों ने रंगोली बनाई। घरों के सामने दीप जलाए गए और आकर्षक विद्युत झालरों से गांव को सजाया गया। ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना कर त्योहार मनाया।

सिरदार देव से जुड़ी है सदियों पुरानी मान्यता

सेमरा गांव में दीपावली जल्दी मनाने के पीछे सिरदार सिर देव से जुड़ी एक प्रचलित लोककथा बताई जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, पुराने समय में सिरदार देव गांव में अखाड़ा खेलने आया करते थे। एक दिन सिरदार देव और उनका घोड़ा जंगल में शेर के शिकार बन गए।

मान्यता है कि इसके बाद सिरदार देव गांव के पुजारी के सपने में आए और उन्होंने स्वयं को देवता के रूप में मानने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने एक विशेष शर्त भी रखी कि गांव में कोई भी त्योहार निर्धारित तिथि से एक सप्ताह पहले मनाया जाए। ग्रामीणों के बीच ऐसी मान्यता प्रचलित हो गई कि यदि इस परंपरा का पालन नहीं किया गया तो गांव में किसी प्रकार की अनहोनी हो सकती है।

बताया जाता है कि तभी से गांव में इस परंपरा की शुरुआत हुई और आज भी ग्रामीण इसे पूरी आस्था के साथ निभा रहे हैं।

चार त्योहार मनाए जाते हैं एक सप्ताह पहले

सेमरा गांव की खास बात यह है कि यहां केवल दीपावली ही नहीं, बल्कि कुल चार प्रमुख त्योहार सामान्य तिथि से लगभग एक सप्ताह पहले मनाए जाते हैं। त्योहारों की शुरुआत सिरदार देव की विशेष पूजा-अर्चना से होती है। ग्रामीण पहले मंदिर में देवता की आराधना करते हैं, इसके बाद पारंपरिक तरीके से त्योहार का आयोजन किया जाता है।

गांव में स्थित सिरदार देव मंदिर को लेकर भी एक विशेष परंपरा है। यहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित बताया जाता है और मंदिर में केवल पुरुष ही पूजा-अर्चना करते हैं। ग्रामीण आज भी इस नियम का पालन करते हैं।

बीमारी और विपदाओं से बचाव का विश्वास

ग्रामीणों का मानना है कि सिरदार देव की पूजा करने और त्योहारों को एक सप्ताह पहले मनाने से गांव में सुख-शांति बनी रहती है। वे इस परंपरा को बीमारी, अकाल और दूसरी प्राकृतिक विपदाओं से गांव की रक्षा से जोड़कर देखते हैं। यही वजह है कि आधुनिक समय में भी गांव के लोगों ने अपनी पुरानी मान्यताओं और परंपराओं को जीवित रखा है।

सेमरा गांव की यह परंपरा छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, ग्रामीण आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों की एक अनोखी मिसाल है। जहां देश के दूसरे हिस्सों में लोग 8 नवंबर को दीपावली मनाएंगे, वहीं धमतरी के इस गांव में पहले ही दीपों का त्योहार मनाकर ग्रामीणों ने अपनी सदियों पुरानी परंपरा को एक बार फिर निभाया है।