
पखांजुर। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत श्यामनगर में विकास कार्यों के लिए निकाली गई राशि को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों और पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि कई निर्माण कार्यों के नाम पर राशि आहरित की गई, लेकिन मौके पर या तो काम अधूरा है या निर्माण शुरू ही नहीं हुआ। शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में जिन कार्यों के लिए सरकारी राशि खर्च किए जाने का उल्लेख किया गया है, उनका मौके पर वास्तविक स्वरूप स्पष्ट नहीं है। इसी वजह से भुगतान और निर्माण की स्थिति की जांच की मांग उठाई गई है।
शौचालय मरम्मत के नाम पर राशि निकालने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पीवी-14 में बालक-बालिका शौचालय के जीर्णोद्धार के लिए राशि आहरित की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कार्य को लेकर मौके पर निर्माण या मरम्मत का काम अभी भी अधूरा है। ग्रामीणों ने यह सवाल उठाया है कि यदि काम के लिए राशि जारी और आहरित की गई है, तो मौके पर कितना काम हुआ और भुगतान किस आधार पर किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए।
पुलिया निर्माण और सामुदायिक भवन को लेकर भी सवाल
शिकायत में गौठान मार्ग पर पुलिया निर्माण के लिए करीब 4 लाख रुपये की राशि आहरित किए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने निर्माण की वास्तविक स्थिति की जांच की मांग की है। इसी तरह पीवी-43 में सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर भी शिकायत की गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, इस काम के लिए करीब 1 लाख 20 हजार रुपये लगभग दो साल पहले आहरित किए गए थे, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य दिखाई नहीं दे रहा है। इन आरोपों की वास्तविकता क्या है, यह संबंधित अभिलेखों और मौके पर होने वाले सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कैशबुक और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग
मामले में उपसरपंच, वार्ड पंच और ग्रामीणों ने पंचायत के वित्तीय दस्तावेजों की जांच कराने की मांग रखी है। शिकायतकर्ताओं ने कैशबुक, मास्टर रोल और भुगतान से जुड़े अभिलेखों की जांच के साथ निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस कार्य के लिए कितनी राशि निकाली गई, भुगतान किस व्यक्ति या संस्था को किया गया और उसके मुकाबले मौके पर कितना निर्माण हुआ।
कलेक्टर से जांच के बाद ही सामने आएगी स्थिति
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने मामले की शिकायत कलेक्टर से करते हुए जांच की मांग की है। अब संबंधित विभाग की जांच और भौतिक सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या रिकॉर्ड और मौके के काम में अंतर सामने आता है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, मामला शिकायत और जांच की मांग के स्तर पर है।