
बिलासपुर | छत्तीसगढ़ के विवादित और सस्पेंडेड आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछली सरकार के चर्चित कोल लेवी घोटाले में जांच का सामना कर चुके डांगी के करियर पर अब एक और दाग लग गया है। एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी का सात साल तक शारीरिक और मानसिक शोषण करने के गंभीर मामले में उनके खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी कर दिया गया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने बिलासपुर हाईकोर्ट में आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि प्राथमिक जांच में आईपीएस डांगी पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप सही पाए गए हैं।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में 'रखवाले ही जब भक्षक बन जाएं' वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है। पीड़िता ने पुलिस महकमे की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद राज्य शासन को अपना फैसला बदलना पड़ा। केस में अब प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप में आईपीएस प्रशांत अग्रवाल की जगह महिला आईपीएस पारुल माथुर को नियुक्त किया गया है। वहीं, जांच की कमान एडीजी दीपांशु काबरा के हाथों में सौंपी गई है। सरकार की इस कार्रवाई और संतोषजनक जवाब के बाद हाईकोर्ट ने मामले को निराकृत (Dispose) कर दिया है।
यह पहली बार नहीं है जब आईपीएस डांगी विवादों में हैं। पिछली भूपेश बघेल सरकार के दौरान चर्चित कोयला लेवी घोटाले में भी वे जांच एजेंसियों के राडार पर थे। लेकिन इस बार खाकी के रसूख और महिला सुरक्षा से जुड़े इस संगीन मामले ने उनके करियर पर गहरा दाग लगा दिया है।
7 साल तक रसूख का दुरुपयोग
पुलिस विभाग में ही पदस्थ सब-इंस्पेक्टर (SI) की पत्नी ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस मुख्यालय (PHQ) में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता का आरोप था कि आईपीएस डांगी अपने ऊंचे पद का बेजा इस्तेमाल करते हुए बीते सात सालों से उसका यौन और मानसिक शोषण कर रहे थे। इस आरोप के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। गृह सचिव हिमशिखर गुप्ता ने सख्ती दिखाते हुए डांगी को पद से हटा दिया था और बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया। हालांकि, डांगी शुरू से ही इन आरोपों को झूठा बताते रहे हैं।
महिला अपराध में महिला अफसर ही करे पैरवी'
प्रारंभिक जांच के दौरान शासन ने आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया था। लेकिन पीड़िता और उनके परिजनों ने जांच में पक्षपात का आरोप लगाते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज की। पीड़िता का तर्क था कि विभागीय लोग डांगी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए महिला अपराध जैसे संवेदनशील मामले में किसी महिला अफसर को ही यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर लगाई गई याचिका पर हाईकोर्ट ने गृह सचिव और डीजीपी से जवाब तलब किया था।
आरोपों की हुई पुष्टि
पीड़िता के वकील अभिषेक पांडेय ने बताया कि 14 अक्टूबर को हाईकोर्ट में मामले की अहम सुनवाई हुई। इस दौरान डीजीपी ने कोर्ट को बताया कि प्रारंभिक जांच में यौन शोषण के आरोप प्रमाणित हो चुके हैं और इसी आधार पर सस्पेंडेड आईपीएस के खिलाफ आरोप पत्र जारी कर दिया गया है। शासन ने कोर्ट को यह भी बताया कि पीड़िता की मांग का संज्ञान लेते हुए प्रशांत अग्रवाल को हटाकर आईपीएस पारुल माथुर को पक्ष रखने की जिम्मेदारी दे दी गई है।
विवादों के पुराना नाता: कोल लेवी घोटाले में भी आया था नाम
आईपीएस डांगी का विवादों से पुराना नाता रहा है। वर्तमान केस से पहले, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में वे कोल (कोयला) लेवी घोटाले में भी बुरी तरह घिरे थे। तब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें तलब कर पूछताछ की थी और उनके खिलाफ विभागीय जांच (डिपार्टमेंटल इंक्वायरी) के लिए नोटिस भी जारी हुआ था। भ्रष्टाचार के बाद अब महिला शोषण के प्रमाणित आरोपों ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।