
बिलासपुर। जिले में स्थित प्रदेश के एकमात्र कोपरा रामसर साइट के संरक्षण की दिशा में अब जाकर प्रशासनिक सुगबुगाहट तेज हुई है। कोपरा जलाशय को रामसर का दर्जा मिलने के करीब सात महीने बाद वन विभाग ने अपनी पहली प्राथमिक सर्वे रिपोर्ट तैयार कर ली है। जिला वेटलैंड समिति के जरिए यह रिपोर्ट राज्य शासन को अग्रसारित की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, रामसर साइट के पांच किलोमीटर की परिधि में दो कोल वाशरी और नौ कोल डिपो संचालित हो रहे हैं, जिन्हें वहां से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है।
कैचमेंट क्षेत्र में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां
वन विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में कोपरा, बेलमुंडी, सैदा और संबलपुरी-बहतराई इलाकों में चल रही औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार से उल्लेख है। रिपोर्ट बताती है कि ये सभी कोल वाशरी और डिपो ऊंचाई वाले स्थानों पर मौजूद हैं। बारिश होने पर पानी का बहाव इन्हीं इलाकों से होकर सीधे कोपरा जलाशय के कैचमेंट एरिया की ओर आता है। इससे जलाशय के पानी में कोयले का अंश मिलने की आशंका बनी रहती है, जो जलीय जीवों और पक्षियों के लिए नुकसानदायक है।
सड़क के दोनों किनारों पर कोयले का भंडारण
रिपोर्ट के विवरण पर नजर डालें तो रामसर जाने वाले मार्ग के दोनों तरफ कोल डिपो सक्रिय हैं। इनमें से तीन डिपो तो जलाशय की सीमा से बिल्कुल लगे हुए पाए गए हैं। दाईं तरफ एक और बाईं तरफ दो डिपो स्थित हैं। बाईं दिशा में महज 500 मीटर की दूरी पर एक बड़ी कोल वाशरी चल रही है। यहां रोजाना बड़े स्तर पर कोयले की लोडिंग और अनलोडिंग का काम होता है। इसी के आसपास तीन अन्य बड़े कोल डिपो भी मौजूद हैं। वहीं फोरलेन सड़क के दूसरी तरफ भी एक डिपो संचालित है, जिसकी दूरी रामसर कैचमेंट से लगभग 100 से 200 मीटर के बीच बताई गई है।
दिल्ली और राज्य की संयुक्त टीम करेगी दौरा
प्रस्तावित सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अब आगे की कार्रवाई तय की जानी है। रामसर साइट के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान बनाने की तैयारी है। यह प्लान राज्य जैव विविधता बोर्ड और दिल्ली के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में तैयार होगा। इसके लिए दिल्ली और राज्य स्तर की एक संयुक्त टीम जल्द ही मौके का सघन सर्वे करेगी। इस दौरान पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों, उनके रहने के स्थानों, उनकी आवाजाही और कैचमेंट क्षेत्र को बचाने के उपायों पर बारीकी से अध्ययन किया जाएगा।
प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का बड़ा केंद्र
2.10 वर्ग किलोमीटर (लगभग 210 हेक्टेयर) में फैला कोपरा जलाशय पक्षियों के लिए एक बड़ा आश्रय स्थल है। यहां हर वर्ष काफी संख्या में प्रवासी और स्थानीय पक्षी आते हैं। इनमें मुख्य रूप से यूरेशियन कूट, मार्श हैरियर, गर्गनी, जलमुर्गी, नॉर्दर्न पिनटेल, नॉर्दर्न शोवलर, भारतीय पिट्टा, ब्लूथ्रोट, नदी टिटिहरी, भारतीय स्वर्गीय फ्लायकैचर और सफेद-दुम शामा जैसी कई प्रजातियां शामिल हैं। इन पक्षियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना मास्टर प्लान का मुख्य हिस्सा होगा।
कार्रवाई राज्य स्तर से होगी तय: डीएफओ
बिलासपुर वन मंडल के डीएफओ नीरज यादव के अनुसार, कोपरा को रामसर घोषित किए जाने के बाद उसके कैचमेंट क्षेत्र और पांच किलोमीटर के दायरे में चल रहे उद्योगों, कोल वाशरी और कोल डिपो का प्राथमिक सर्वे पूरा करा लिया गया है। यह सर्वे रिपोर्ट जिला वेटलैंड समिति के माध्यम से राज्य स्तर पर भेज दी गई है। आगे की जो भी कार्रवाई होगी, वह राज्य शासन के स्तर से ही निर्धारित की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस पहचान को बरकरार रखने के लिए इन वाणिज्यिक गतिविधियों पर नियंत्रण लगाना आवश्यक हो गया है।