तखतपुर। ग्राम कुरेली सब-स्टेशन में ऑपरेटर अमन साहू की करंट की चपेट में आने के बाद हुई मौत के मामले में आक्रोशित भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों ने सब-स्टेशन में जमकर हंगामा किया साथ ही शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की थी।

इस घटना के बाद हिर्री पुलिस की भूमिका एकतरफा नजर आ रही है। मामले में हिर्री पुलिस ने कार्रवाई कर हुए केवल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। बता दें कि ये सातों लोग एक ही कौशिक परिवार के हैं। दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर इस पूरी घटना और मारपीट का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें मारपीट करने वाले मुख्य आरोपी भी नजर आ रहे हैं, मगर पुलिस की एफआईआर में इन मुख्य आरोपियों के नाम तक दर्ज नहीं हैं।

वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे आरोपी...

घटना के वायरल वीडियो में दिलीप साहू, सुयोग साहू, त्रिलोचन साहू, संजय साहू, धनंजय साहू और हरिओम साहू अपने साथियों के साथ भीड़ में मारपीट करते नजर आ रहे हैं। इस घटना में बिजली विभाग के कार्यपालन यंत्री (ईई) मिलिंद पांडेय के साथ भी हाथापाई हुई है। बावजूद इसके पुलिस ने अब तक इन लोगों पर कोई कार्यवाही नहीं की है। 

आरोपियों को बचाने राजनैतिक दबाव...

बताया जा रहा है खुलेआम घूम रहे इन आरोपियों को बचाने थाना प्रभारी को रसूखदार नेताओं का फोन आ रहा है। सवाल यह है कि मारपीट की शुरुआत करने वालों को छोड़कर सिर्फ एक विशेष समाज को ही टारगेट क्यों किया गया और बाकी पर कार्यवाही क्यों नहीं की गई।

हिर्री थाना प्रभारी निरीक्षक दामोदर प्रसाद मिश्रा और पीएसआई उषा निषाद की टीम ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण और चकरभाठा सीएसपी के मार्गदर्शन में अब तक केवल सात लोगों को पकड़ा है। इनमें दीपक कौशिक (27), शुभम कौशिक (27), सत्यम कौशिक (30), उमाशंकर कौशिक (28), आयुष कौशिक (24), ओमप्रकाश कौशिक (32) और ललित कुमार कौशिक (24) शामिल हैं। ये सभी कुरेली के निवासी हैं। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर इन्हें कार्यपालिक दंडाधिकारी के सामने पेश किया है। 

प्रतिबंधात्मक कार्यवाही मगर तीन दिन बीत जाने के बाद भी जमानत नहीं....

प्रतिबंधात्मक कार्यवाही कर जेल भेजे गए इन सातों युवकों की तीन दिन बीत जाने के बाद भी जमानत नहीं हो सकी है। सूत्रों के अनुसार तहसीलदार स्तर पर इनके जमानत आवेदन को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है  इधर युवको के बचाव पक्ष के अधिवक्ताओ को कार्यालय से रोज पेशी देकर लौटाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार फाइल में अब तक एक सिंगल नोट शीट भी नहीं चलाई गई है।

      प्रशासनिक स्तर पर चल रहे इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार किसी एडिशनल अधिकारी ने तहसीलदार फोन कर फाइल को पेंडिंग रखने के निर्देश दिए है । और कहा है कि मामले का निराकरण अभी नहीं करना है और इन्हें दीपावली तक जेल में रखकर मजा चखाना है। अब सवाल ये उठ रहा है कि फाइल रोकने का निर्देश देने वाला वह कौन एडिशनल अधिकारी है और किसके कहने पर यह अधिकारी काम कर रहा है। सूत्रों की मानें तो जिले के एक प्रशासनिक अधिकारी ने भी एडिशनल को फोन कर जमानत आवेदनों पर सुनवाई न करने की बात कही है।

इस पुलिसिया और प्रशासनिक रवैए के पीछे राजनीतिक दखल की बात सामने आ रही है। एक नेता द्वारा टीआई और एडिशनल एसपी को फोन कर यह निर्देश दिया गया है कि साहू समाज के आरोपियों और उनके परिवार को हाँथ नहीं लगाना है। ऐसे में लोग यह जानना चाह रहे हैं कि पुलिस के हाथ बांधने वाला वह कौन रसूखदार नेता है।

अगर पुलिस सही समय पर आती तो नहीं होता विवाद...

घटना वाले दिन पुलिस की लेटलतीफी ने भी विवाद को बढ़ाया। खुद कार्यपालन यंत्री मिलिंद पांडेय ने इस बात की पुष्टि की है कि बवाल और मारपीट के दौरान उन्होंने दो से तीन बार थाना प्रभारी को फोन किया था, मगर उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। मिलिंद पांडेय का स्पष्ट कहना है कि यदि टीआई समय रहते मौके पर पहुंच जाते, तो मारपीट की यह नौबत ही नहीं आती।