लखीसराय। बिहार में NEET परीक्षा के दौरान सामने आए सॉल्वर गैंग के खुलासे ने देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे केवल नकल या फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं हैं, बल्कि परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में गहरी सेंध की ओर इशारा करते हैं। आरोप है कि गिरोह ने बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी सुरक्षा प्रणाली को भी प्रभावित कर फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचा दिया।

पुलिस जांच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क में मेडिकल छात्रों, बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े लोगों और बिचौलियों की कथित भूमिका सामने आई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस व्यवस्था को पहचान सत्यापन का सबसे सुरक्षित माध्यम माना जाता है, उसी में कथित मिलीभगत के जरिए सेंध लगाई गई। इससे लाखों मेहनती छात्रों और अभिभावकों के मन में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले में अब तक 30 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें कई मेडिकल छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की डील की जाती थी। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक परीक्षा घोटाला नहीं बल्कि प्रतिभा और मेहनत के साथ किया गया संगठित छल माना जाएगा।

फिलहाल, पुलिस बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड और डिजिटल लेन-देन की जांच कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बार-बार परीक्षा प्रणाली में ऐसी सेंध कैसे लग रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच कितनी गहराई तक पहुंचती है और इस पूरे रैकेट के पीछे छिपे बड़े चेहरों का पर्दाफाश कब तक होता है।