
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलिथीन पर प्रतिबंध होने के बावजूद इसका खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। सिस्टम की इस घोर लापरवाही और विभागीय नाकामी पर अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को तलब करते हुए शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में पूछा है कि जब प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह से प्रतिबंधित है, तो बाजारों में इसका अनियंत्रित उपयोग कैसे हो रहा है?
पर्यावरण संरक्षण मंडल की खामोशी से बिगड़े हालात
राज्य में सिंगल यूज प्लास्टिक के निर्माण, उपयोग, विक्रय, वितरण, परिवहन, संग्रहण और आयात पर कानूनी रूप से पूरी तरह से रोक लगी हुई है। इसके बावजूद राजधानी रायपुर से लेकर बिलासपुर तक हर छोटी-बड़ी दुकानों में इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल और नगरीय निकायों की निष्क्रियता के चलते रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की है।
सिंघवी अगस्त 2024 से लगातार शासन-प्रशासन को पत्र लिखकर इस खतरनाक प्लास्टिक पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। जब जिम्मेदार अधिकारियों और पर्यावरण विभाग ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो मामला हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया।
फुटकर नहीं, पूरी 'सप्लाई चेन' ध्वस्त करने की मांग
याचिका में अदालत के सामने सबसे अहम मुद्दा 'सप्लाई चेन' का उठाया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि छोटे दुकानदारों पर सिर्फ दिखावटी जुर्माने की कार्रवाई से यह समस्या खत्म नहीं होगी। याचिकाकर्ता ने राज्य शासन को कटघरे में खड़ा करते हुए मांग की है कि:
उच्च स्तरीय समिति बने
आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में तत्काल एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए।
उत्पादकों पर कसे नकेल:
यह समिति सबसे पहले खुफिया तरीके से यह पता लगाए कि प्रतिबंध के बावजूद ये कैरी बैग्स और पॉलिथीन किन फैक्ट्रियों में निर्मित हो रहे हैं और किस बॉर्डर से छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर रहे हैं।
जड़ से खात्मा: नियमों का उल्लंघन करने वाले बड़े उत्पादकों (Manufacturers) और सप्लायर्स पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि प्रतिबंधित प्लास्टिक की पूरी सप्लाई चेन को जड़ से ध्वस्त किया जा सके।
13 मई को होगी अगली सुनवाई, प्रशासन में हड़कंप
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने जनहित याचिका में उठाए गए बिंदुओं को बेहद गंभीरता से लिया है। अदालत ने स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह इस प्लास्टिक के चलन पर रोक लगाने में विफल रहे सरकारी तंत्र से तीखे सवाल किए हैं।
अब मुख्य सचिव को शपथ पत्र पर यह बताना होगा कि सरकार ने इस माफिया और सप्लाई चेन को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 मई को निर्धारित की गई है।