
मंत्रालय से हटाए गए अधीक्षण अभियंता सिंघारे, विवादित शर्त 1.3(b) जोड़ने वाले सिद्दीकी को इनाम में मिली मुख्य अभियंता की कुर्सी
रायपुर। 2,549 करोड़ रुपये के चर्चित सिकासेर-कोडार लिंक प्रोजेक्ट निविदा विवाद में जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़े हो गए हैं। 'राष्ट्रीय जगत विजन' में निविदा की कथित गड़बड़ी और ई-फाइल पर दर्ज आपत्ति का खुलासा होने के बाद महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। मामले को दबाने के लिए 17 अगस्त को प्रमुख अभियंता कार्यालय ने एक आदेश जारी कर ई-फाइल पर लिखित आपत्ति दर्ज कराने वाले अधीक्षण अभियंता (रू.) शिवराम सिंघारे को मंत्रालय से हटा दिया है।
उन्हें प्रमुख अभियंता कार्यालय, शिवनाथ भवन (नवा रायपुर) में अस्थायी रूप से अटैच कर दिया गया है। इसके विपरीत, निविदा में विवादास्पद शर्त जोड़ने के आरोपी अधिकारी आई.ए. सिद्दीकी को मुख्य अभियंता (मॉनिटरिंग) के पद पर प्रमोट कर दिया गया है।
अधिकारियों के हटाने की पूरी कहानी....
विभाग में ईमानदारी से काम करने वाले तकनीकी अधिकारियों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। इस निविदा प्रकरण में शिवराम सिंघारे तीसरे शिकार बने हैं:
कुबेर गुरुवर (पूर्व मुख्य अभियंता)
निविदा प्रकोष्ठ में तैनाती के दौरान नियमों के विपरीत बदलाव करने से इनकार किया, जिसके बाद समय पूर्व हटाए गए।
संजय भागवत (पूर्व मुख्य अभियंता)
तकनीकी अनियमितताओं पर असहमति जताई, इन्हें भी पद से बेदखल कर दिया गया।
शिवराम सिंघारे (अधीक्षण अभियंता):
ई-फाइल पर कंडिका 1.3(b) के खिलाफ लिखित टीप दर्ज की, जिसके बदले 17 अगस्त को मंत्रालय से हटाकर अटैच कर दिया गया।
मौखिक निर्देश पर जारी हुआ आदेश
प्रमुख अभियंता कार्यालय के पृष्ठांकन क्रमांक 3317045/छ.ग./2019/6896 (दिनांक 17.08.2026) के तहत सिंघारे के 05 अक्टूबर 2021 के पदस्थापना आदेश को निरस्त किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, सीएम हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने विभागीय सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो को मौखिक निर्देश दिया। इसके बाद सचिव के निर्देश पर प्रमुख अभियंता जितेंद्र कुमार नेताम ने यह आदेश जारी किया। आदेश में न तो किसी आरोप-पत्र का उल्लेख है और न ही किसी विभागीय जांच की बात कही गई है।
कंडिका 1.3(b) का पूरा खेल
मुख्य सचिव की 64वीं कार्यकारिणी बैठक में केवल कंडिका 1.3(a) (1,019.94 करोड़ रुपये की वित्तीय क्षमता) को मंजूरी मिली थी। लेकिन आरोप है कि आई.ए. सिद्दीकी ने फाइल विभाग लौटने पर 1.3(b) की नई शर्त जोड़ दी। इसके तहत औसत सालाना टर्नओवर 5,099.72 करोड़ रुपये (प्रोजेक्ट लागत से दोगुना) तय कर दिया गया। देवरगांव-मटनार और सिरपुर प्रोजेक्ट में यह शर्त नहीं थी।
जब मुख्यमंत्री के अनुमोदन के लिए फाइल भेजी जानी थी, तब सिंघारे ने मैनुअल फाइल के बजाय ई-फाइल पर इस शर्त का कड़ा विरोध किया था। इसके बावजूद सिद्दीकी ने अलग से मैनुअल फाइल तैयार कराकर टेंडर जारी करवा दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देने की तैयारी
मामला अब कानूनी विवादों में फंसता दिख रहा है। हाईकोर्ट के आदेश (WPC संख्या 4026/2026, दिनांक 10 अगस्त 2026) को चुनौती देते हुए नई याचिका दायर करने की तैयारी चल रही है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर एक चुनिंदा कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया और उसे L-1 घोषित किया गया।
विभाग के समक्ष अनुत्तरित प्रश्न
1. ई-फाइल पर नियमों के तहत आपत्ति दर्ज कराने वाले अधिकारी को बिना किसी जांच के क्यों हटाया गया?
2. जिस अधिकारी पर टेंडर शर्तों में हेरफेर का आरोप है, उसे पदोन्नत कर मुख्य अभियंता का प्रभार क्यों दिया गया?
(नोट: इस पूरे मामले में प्रतिक्रिया के लिए विभागीय सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता जितेंद्र कुमार नेताम और मुख्य अभियंता आई.ए. सिद्दीकी से संपर्क साधा गया है। उनका पक्ष
आते ही प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)