
बिलासपुर: Chhattisgarh High Court ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित पदों पर निर्धारित सीमा से अधिक दिव्यांग उम्मीदवारों की नियुक्ति करना कानून और आरक्षण नियमों के खिलाफ है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल मेरिट के आधार पर तय कोटे से ज्यादा चयन करना समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन माना जाएगा। कोर्ट ने राज्य सरकार को पूरी चयन प्रक्रिया की समीक्षा कर 90 दिनों के भीतर नई मेरिट सूची जारी करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला शिक्षक और व्याख्याता भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें उमेश कुमार श्रीवास समेत अन्य अभ्यर्थियों ने याचिका दायर कर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी भर्ती प्रक्रिया में OBC वर्ग के पदों पर दिव्यांग उम्मीदवारों का चयन तय 7 प्रतिशत सीमा से अधिक कर लिया गया, जिससे सामान्य OBC अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हुए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि चयन समिति द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया आरक्षण नियमों और संतुलित प्रतिनिधित्व की भावना के अनुरूप नहीं थी।
जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा कि भर्ती प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें सभी वर्गों को समान अवसर मिले और किसी भी श्रेणी के अधिकार प्रभावित न हों। अदालत की इस टिप्पणी को भविष्य की सरकारी भर्तियों के लिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे आरक्षण और दिव्यांग कोटे के संतुलन को लेकर स्पष्ट कानूनी दिशा तय होती दिखाई दे रही है।