
रायपुर : छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों में मनमाने ढंग से कर्मचारियों को काम पर रखने की व्यवस्था पर शासन ने कड़ा शिकंजा कस दिया है। पीडब्ल्यूडी ने अपने मुख्यालय से लेकर सभी अधीनस्थ कार्यालयों तक मस्टर रोल, दैनिक वेतनभोगी और कलेक्टर दर पर होने वाली नई नियुक्तियों पर सख्त पाबंदी लगा दी है। शासन ने दो टूक आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2026 के बाद इन श्रेणियों में किसी भी नए श्रमिक या कर्मचारी को काम पर नहीं रखा जा सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को सिर्फ विभागीय कार्रवाई ही नहीं झेलनी पड़ेगी, बल्कि अनधिकृत नियुक्तियों से सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई भी अपनी जेब से करनी होगी।
बिना स्वीकृति नियुक्ति सरकारी नियमों का उल्लंघन
शासन ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत सेटअप और बजट में प्रावधान के बिना मस्टर रोल या दैनिक वेतन पर किसी भी कर्मचारी को रखना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। छत्तीसगढ़ वित्तीय संहिता के प्रावधानों के अनुसार सक्षम अधिकारी की पूर्व प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के बिना किसी श्रमिक को काम पर रखना अनधिकृत वित्तीय दायित्व माना जाएगा।
2008 के आदेश का दिया हवाला
नए निर्देश में सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2008 को जारी परिपत्र का भी उल्लेख किया गया है। इस परिपत्र के जरिए दैनिक वेतनभोगी और कलेक्टर दर पर अनियमित नियुक्तियों पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद यदि कहीं नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां की जाती हैं तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी।
अधिकारी के वेतन और पेंशन पर भी पड़ेगी मार
आदेश में सबसे सख्त प्रावधान वित्तीय नुकसान की वसूली को लेकर है। यदि 1 अप्रैल 2026 के बाद किसी कार्यालय में प्रतिबंध के बावजूद नई नियुक्ति की जाती है तो इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना जाएगा। संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। इतना ही नहीं, ऐसी नियुक्तियों के कारण शासन को होने वाली वित्तीय क्षति की पूरी राशि दोषी अधिकारी के वेतन अथवा पेंशन से वसूल की जाएगी।
सरकारी खजाने पर बोझ रोकने की कवायद
शासन के इस फैसले का मकसद बिना स्वीकृत पद और बजट प्रावधान के कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। साथ ही सरकारी विभागों में नियुक्तियों को वित्तीय अनुशासन के दायरे में लाना और अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है। साफ है कि अब पीडब्ल्यूडी के किसी भी कार्यालय में नियमों को दरकिनार कर श्रमिक रखने का फैसला संबंधित अधिकारी को भारी पड़ सकता है।