पीरियड्स के दौरान सही सैनिटरी पैड चुनना महिलाओं की सेहत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल पैड की सोखने की क्षमता ही नहीं, बल्कि उसकी क्वॉलिटी और त्वचा पर पड़ने वाला असर भी काफी मायने रखता है। खराब गुणवत्ता वाले पैड की वजह से खुजली, जलन, चकत्ते और संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, खासकर गर्म और उमस वाले मौसम में।

डॉक्टरों के अनुसार, सैनिटरी पैड की ऊपरी परत शरीर के बेहद संवेदनशील हिस्से के सीधे संपर्क में रहती है। अगर पैड में ज्यादा खुशबू, केमिकल्स या खराब मटेरियल इस्तेमाल किया गया हो, तो इससे स्किन इरिटेशन और बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक एक ही पैड इस्तेमाल करना भी संक्रमण की बड़ी वजह माना जाता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महिलाओं को ऐसे सैनिटरी पैड चुनने चाहिए जिनकी ऊपरी परत मुलायम, हवा पार होने वाली और त्वचा के लिए सुरक्षित हो। बहुत ज्यादा फ्रेगरेंस वाले पैड से बचना बेहतर माना जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि हर 4 से 6 घंटे में पैड बदलना जरूरी है, ताकि बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम हो सके। जिन महिलाओं को ज्यादा पसीना, रैशेज या स्किन एलर्जी की समस्या होती है, उनके लिए सूती और स्किन-फ्रेंडली पैड बेहतर विकल्प माने जाते हैं।

हाल के वर्षों में सैनिटरी पैड्स में नई तकनीक और प्राकृतिक तत्वों का इस्तेमाल भी बढ़ा है। मोरिंगा आधारित पैड्स को लेकर चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि मोरिंगा में एंटीबैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे त्वचा की जलन और बदबू कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं कुछ रिसर्च में पीएच-रिस्पॉन्सिव सैनिटरी पैड्स को बेहतर आराम और नमी कंट्रोल के लिए फायदेमंद बताया गया है। डॉक्टरों का मानना है कि पीरियड्स स्वच्छता सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य से जुड़ा अहम हिस्सा है। इसलिए सही सैनिटरी पैड चुनना और स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है।