रायसेन: मध्य प्रदेश की रायसेन जिला जेल में आज सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक विचाराधीन कैदी ने जेल प्रहरी पर कथित तौर पर देसी कट्टे से फायर कर दिया। गोली लगने से प्रहरी दिग्विजय सिंह तोमर गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें भोपाल एम्स रेफर किया गया है। वारदात के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और अंदर हथियार पहुंचने को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना सुबह करीब 9 बजे की बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, हत्या और हत्या के प्रयास के मामलों में जेल में बंद नीलेश ठाकुर उर्फ नीलेश निर्वेदी फल की टोकरी लेकर जेल के मुख्य गेट तक पहुंचा था। इसी दौरान गेट पर तैनात प्रहरी ने उसे अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। आरोप है कि इसी बात पर कैदी ने अचानक कट्टा निकालकर गोली चला दी।

गेट पर फायरिंग के बाद मची अफरा-तफरी
बताया जा रहा है कि जेल परिसर में स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया जाना था। इसी कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियों के बीच कैदी फल की टोकरी लेकर मुख्य गेट तक पहुंचा था। प्रहरी द्वारा गेट खोलने से इनकार किए जाने के बाद स्थिति अचानक बिगड़ गई। आरोप है कि नीलेश ने हथियार निकालकर दिग्विजय सिंह तोमर पर फायर कर दिया। गोली चलने के बाद उसने भागने की कोशिश की, लेकिन जेल के कर्मचारियों ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।g

गोली फेफड़े में फंसी, हालत गंभीर
फायरिंग में घायल प्रहरी को तत्काल रायसेन जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की जांच में गोली फेफड़े के निचले हिस्से में फंसी होने की बात सामने आई। चिकित्सकों के अनुसार फेफड़े में पानी जमा होने के कारण घायल को सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए भोपाल एम्स रेफर कर दिया। उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में किया जा रहा है।

हत्या और हत्या के प्रयास के मामलों में बंद था कैदी
पुलिस के अनुसार आरोपी नीलेश ठाकुर रायसेन जिले के बरेली क्षेत्र के दिमाड़ा गांव का निवासी है। वह हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़े मामलों में विचाराधीन कैदी के रूप में जिला जेल में बंद था। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 307 के तहत मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस उसकी पूरी गतिविधियों और घटना से पहले की परिस्थितियों की भी पड़ताल कर रही है।

जेल के अंदर कट्टा पहुंचा कैसे? जांच का सबसे बड़ा सवाल
फायरिंग की घटना से ज्यादा गंभीर सवाल अब जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। जिस परिसर में कैदियों की तलाशी और सुरक्षा जांच की सख्त व्यवस्था होती है, वहां एक विचाराधीन कैदी तक देसी कट्टा कैसे पहुंचा? जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हथियार जेल के भीतर किस रास्ते से पहुंचा। क्या इसे बाहर से किसी व्यक्ति के जरिए अंदर लाया गया या सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर चूक हुई, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

इसके अलावा आरोपी को हथियार मिलने में किसी जेलकर्मी या अन्य व्यक्ति की भूमिका रही या नहीं, यह भी जांच के दायरे में है। पुलिस और जेल प्रशासन अब CCTV फुटेज, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और घटना से पहले कैदी की गतिविधियों की जानकारी जुटा सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही फायरिंग के पीछे की वास्तविक वजह और जेल में हथियार पहुंचने का पूरा नेटवर्क सामने आएगा।