
बलौदाबाजार। सरकारी विभागों में दस्तावेजों की जालसाजी का एक चौंकाने वाला मामला बलौदाबाजार जिले में सामने आया है। ग्रामीण चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी के नाम से कथित फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार कर उसे विभागीय आदेश के तौर पर पेश किया गया। जांच में आदेश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए। मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी आदेश किसने तैयार किया और इसके पीछे असली मकसद क्या था।
रोहांसी से मोपर तबादले का बनाया गया आदेश
मामला पलारी थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहांसी में पदस्थ ग्रामीण चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी करण देवांगन के नाम से एक स्थानांतरण आदेश तैयार किया गया। दस्तावेज में दावा किया गया कि करण देवांगन का तबादला रोहांसी से भाटापारा ब्लॉक के मोपर स्थित स्वास्थ्य केंद्र में कर दिया गया है। इसी आदेश को लेकर करण देवांगन 17 अगस्त को संबंधित ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज वर्मा के पास पहुंचे।
आदेश देखते ही BMO को हुआ शक
बताया जा रहा है कि दस्तावेज देखने के बाद BMO को आदेश की प्रमाणिकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने जिला स्वास्थ्य कार्यालय से आदेश की पुष्टि कराई। यहीं से पूरा मामला खुल गया। जिला स्तर पर जांच में पता चला कि आदेश पत्र पर दर्ज CMHO के हस्ताक्षर वास्तविक नहीं थे। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में भी इस तरह का कोई स्थानांतरण आदेश जारी होने की जानकारी नहीं मिली।
विभाग ने तुरंत पुलिस का दरवाजा खटखटाया
फर्जी आदेश की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को हल्के में नहीं लिया। CMHO के निर्देश पर संबंधित ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से पलारी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। अब पुलिस इस फर्जी दस्तावेज के पीछे की पूरी कहानी तलाश रही है।
आखिर किसने बनाया फर्जी आदेश?
जांच में पुलिस के सामने कई सवाल हैं
- फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार किसने किया?
- CMHO के हस्ताक्षर की नकल कैसे की गई?
- आदेश तैयार करने के लिए विभागीय जानकारी किसने उपलब्ध कराई?
- इसे अधिकारी के सामने पेश करने का उद्देश्य क्या था?
- क्या इसके पीछे किसी तरह का आर्थिक या व्यक्तिगत लाभ जुड़ा था?
- इस मामले में सिर्फ एक व्यक्ति शामिल है या पूरा नेटवर्क?
पुलिस दस्तावेज और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर इन सवालों के जवाब तलाश रही है।
सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा पर भी सवाल
यह मामला सिर्फ फर्जी ट्रांसफर आदेश तक सीमित नहीं है। किसी सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर की कथित नकल कर विभागीय आदेश तैयार किए जाने से सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा और प्रमाणिकता को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अगर जांच में फर्जी दस्तावेज बनाने और इस्तेमाल करने की साजिश साबित होती है तो संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
जांच के बाद खुलेगा पूरा राज
फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। फर्जी आदेश तैयार करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान के साथ-साथ इसके पीछे के उद्देश्य का भी पता लगाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग में एक कागज ने ऐसा हड़कंप मचाया कि पहले तबादला आदेश की सच्चाई जांची गई और फिर सामने आया कि जिस आदेश पर सरकारी मुहर और अधिकारी के हस्ताक्षर दिख रहे थे, वह विभाग ने जारी ही नहीं किया था। अब पुलिस की जांच इस ‘फर्जी ट्रांसफर’ के पीछे छिपे चेहरे तक पहुंचने पर टिकी है।