
रायपुर: Raipur में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें कथित तौर पर शहर के प्रभावशाली कारोबारी और रसूखदार लोग जुड़े पाए गए हैं। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि बाबू खेमानी नामक संचालक के जरिए कई हाई-प्रोफाइल ग्राहकों को सट्टे की आईडी उपलब्ध कराई जाती थी। पुलिस को उसके मोबाइल से स्थायी ग्राहकों की एक लंबी सूची मिली है, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं।
पुलिस के मुताबिक, बाबू खेमानी इस नेटवर्क में “आईडी ऑनर” की भूमिका निभा रहा था, जो अलग-अलग नामों से यूजर्स को सट्टा खेलने के लिए एक्सेस देता था। इन आईडी के जरिए शहर में बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टा संचालित किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपए के लेन-देन की बात सामने आई है, जिससे इस रैकेट के व्यापक फैलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कार्रवाई के तहत आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया है, जबकि उसका भाई करण खेमानी फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में उसकी भी सक्रिय भूमिका रही है और उसकी तलाश तेज कर दी गई है। आने वाले दिनों में मामले में और गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि सट्टे की रकम वसूलने के लिए एक अलग टीम सक्रिय थी, जो बकायादारों पर दबाव बनाती थी। पैसे नहीं देने वालों को धमकाने और सोशल मीडिया के जरिए बदनाम करने की चेतावनी दी जाती थी। कुछ मामलों में रकम की वसूली के बदले सोने के जेवर तक लेने की जानकारी भी सामने आई है, जिससे इस नेटवर्क की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से जुड़े कई कारोबारी भी इस नेटवर्क के संपर्क में थे। पुलिस अब ऐसे सभी लोगों की पहचान कर रही है और पूछताछ के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी में है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे सिंडिकेट की डिजिटल और वित्तीय जांच की जा रही है, ताकि सट्टे की जड़ तक पहुंचा जा सके।
जांच में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है कि बाबू खेमानी खुद को सोशल मीडिया पर एक ‘इन्फ्लुएंसर’ और सफल कारोबारी के रूप में पेश करता था। वह महंगी लाइफस्टाइल, पार्टियों और “प्रिडिक्शन” के जरिए लोगों को जोड़ता था और धीरे-धीरे उन्हें अपने सट्टा नेटवर्क में शामिल करता था। पुलिस का मानना है कि उसकी यही बनाई गई छवि लोगों को आकर्षित करने का सबसे बड़ा जरिया थी, जिसके जरिए यह अवैध कारोबार लंबे समय से फल-फूल रहा था।

