बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी और कार्टून पोस्ट करने के मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी को सशर्त राहत दी है। कोर्ट ने दोनों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और अपने-अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रमुखता से माफी का पोस्ट डालने का निर्देश दिया है।

फेसबुक पर पोस्ट के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर

प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी ने अपने-अपने फेसबुक अकाउंट से असमिया भाषा में राज्यपाल के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और अपमानजनक लेख पोस्ट किए थे। इन पोस्ट के साथ कार्टून भी बनाए गए थे, जिन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। शिकायत के बाद राजभवन की ओर से रायपुर के सिविल लाइन थाने में दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके बाद मामला रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा।

एफआईआर रद्द कराने हाई कोर्ट पहुंचे दोनों

एफआईआर को निरस्त कराने के लिए दोनों ने बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान दोनों की ओर से बिना शर्त माफी मांगने और सोशल मीडिया से आपत्तिजनक सामग्री हटाने की बात कही गई। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता मनोज गोयल ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी को केवल माफी मांगने के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

19 अगस्त को दोबारा पेश किया माफीनामा

सुनवाई के दौरान 19 अगस्त 2026 को दोनों याचिकाकर्ताओं ने दोबारा माफी मांगते हुए हाई कोर्ट में शपथपत्र पेश किया। राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ समझौते पर सहमति जताई। सरकार की ओर से यह तर्क भी रखा गया कि राज्यपाल छत्तीसगढ़ के प्रथम नागरिक और संवैधानिक पद पर हैं। उनके पद की गरिमा और छवि को नुकसान पहुंचाने वाली टिप्पणियों से अलग-अलग वर्गों के बीच तनाव और विवाद बढ़ने की आशंका रहती है।

भविष्य में दोबारा गलती नहीं करने की देनी होगी गारंटी

हाई कोर्ट ने दोनों को राहत देते हुए सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक सामग्री को पूरी तरह हटाने का निर्देश दिया है। दोनों को सार्वजनिक रूप से और कोर्ट के सामने माफी मांगनी होगी। इसके अलावा अपने फेसबुक अकाउंट पर प्रमुखता से माफी का पोस्ट भी डालना होगा। दोनों याचिकाकर्ताओं को शपथपत्र देकर यह भी कहना होगा कि भविष्य में इस तरह की गलती दोबारा नहीं करेंगे। कोर्ट की शर्तों का पालन करना ही उन्हें मिली राहत का आधार होगा।