रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजधानी एयरपोर्ट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। रायपुर समेत देश के 11 हवाई अड्डों के संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी चल रही है। प्रस्ताव के तहत इन एयरपोर्ट्स को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर 50 साल की लीज के लिए निजी कंपनियों को सौंपने की योजना है। प्रस्ताव को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति यानी PPPAC से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इसे सीधे तौर पर एयरपोर्ट का स्वामित्व निजी हाथों में जाना नहीं कहा जा सकता। प्रस्ताव मुख्य रूप से लंबे समय के लिए संचालन और प्रबंधन में निजी भागीदारी से जुड़ा है।

रायपुर और औरंगाबाद को एक ही समूह में रखने का प्रस्ताव
नागर विमानन मंत्रालय की प्रस्तावित योजना के तहत 11 एयरपोर्ट्स को पांच समूहों में बांटने की तैयारी है। एक समूह में शामिल एयरपोर्ट्स का संचालन एक ही निजी कंपनी को देने का प्रस्ताव रखा गया है।

प्रस्तावित समूह इस तरह हैं

  • रायपुर – औरंगाबाद
  • अमृतसर – कांगड़ा गग्गल
  • वाराणसी – गया – कुशीनगर
  • भुवनेश्वर – हुबली
  • तिरुचिरापल्ली – तिरुपति

यानी छत्तीसगढ़ के रायपुर एयरपोर्ट को महाराष्ट्र के औरंगाबाद एयरपोर्ट के साथ एक पैकेज में रखा गया है।

50 साल की लीज, कितना होगा निवेश?
प्रस्ताव के मुताबिक निजी ऑपरेटरों को एयरपोर्ट समूह 50 साल की लीज पर दिए जाने की योजना है। इन 11 एयरपोर्ट्स के संचालन और विकास में निजी कंपनियों की ओर से करीब 8,622 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगाया गया है। सरकार की सोच है कि निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश से एयरपोर्ट की आधारभूत सुविधाओं, संचालन क्षमता और यात्रियों को मिलने वाली सेवाओं में सुधार किया जा सके।

एक कंपनी को कितने एयरपोर्ट मिलेंगे, इस पर भी सीमा
एयरपोर्ट संचालन में निजी भागीदारी बढ़ाने के साथ सरकार बाजार में अत्यधिक केंद्रीकरण के जोखिम को भी सीमित करना चाहती है। इसीलिए एक ही बोलीदाता को कितने एयरपोर्ट समूह दिए जा सकते हैं, इस पर सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कुछ चुनिंदा कंपनियों के हाथों में एयरपोर्ट संचालन का अत्यधिक नियंत्रण न चला जाए।

AAI कर्मचारियों के लिए भी प्रस्तावित व्यवस्था
निजी संचालन की स्थिति में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी AAI के मौजूदा कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी प्रस्ताव में व्यवस्था रखी गई है। इसके तहत निजी ऑपरेटर को शुरुआत में एक साल की संयुक्त प्रबंधन अवधि रखनी होगी। इसके बाद निजी कंपनी को कम से कम तीन साल तक AAI के 60 प्रतिशत कर्मचारियों को बनाए रखने का प्रस्ताव है। इस व्यवस्था का मकसद निजी संचालन शुरू होते ही कर्मचारियों की स्थिति में अचानक बदलाव को रोकना बताया गया है।

डेटा के आधार पर चुने गए एयरपोर्ट
दस्तावेजों के मुताबिक, 11 एयरपोर्ट्स का चयन किसी एक मानक के आधार पर नहीं किया गया है। AAI ने यात्री यातायात, उपलब्ध जमीन, व्यावसायिक क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन जैसे कई मानकों का विश्लेषण किया। पहले 12 बड़े एयरपोर्ट्स का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद 136 छोटे एयरपोर्ट्स की क्षमता और बड़े एयरपोर्ट्स के साथ उनकी संभावित जोड़ी का आकलन किया गया। इसी प्रक्रिया के आधार पर पांच एयरपोर्ट समूह तैयार करने का प्रस्ताव सामने आया है।

रायपुर एयरपोर्ट को क्या फायदा हो सकता है?
यदि प्रस्ताव लागू होता है तो रायपुर एयरपोर्ट के संचालन और विकास में निजी निवेश बढ़ सकता है। इससे टर्मिनल सुविधाओं, यात्री सेवाओं, कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर और एयरपोर्ट के विस्तार से जुड़े कामों में तेजी आने की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, निजी संचालन का मतलब यात्रियों के लिए हर सुविधा स्वतः सस्ती या बेहतर हो जाएगी, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। लीज की शर्तें, टेंडर प्रक्रिया, निजी ऑपरेटर का चयन और अंतिम समझौता सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।

रायपुर एयरपोर्ट को लेकर अब आगे क्या? 
फिलहाल, यह योजना प्रस्ताव के स्तर पर है। PPPAC की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद आगे की प्रक्रिया में बोली, निजी ऑपरेटर का चयन और लीज की विस्तृत शर्तें महत्वपूर्ण होंगी। अगर योजना जमीन पर उतरती है, तो रायपुर एयरपोर्ट का संचालन मॉडल आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकता है।