
रायपुर में सरकार और संगठन का तालमेल बैठाने के लिए बुलाई गई भाजपा की दो दिवसीय बैठक में खूब खरी-खोटी सुनी गई। जिलाध्यक्षों ने अपने ही प्रभारी मंत्रियों की कार्य शैली पर जमकर सवाल दागे । ऐसा लगा मानो मंच पर शिकायत पेटी खोल दी गई हो। सबसे मजेदार वाकया राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के साथ हुआ, जिन्हें सबके सामने हिदायत भी मिली और उन पर तंज भी कसा गया।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के पास सारंगढ़, धमतरी और नारायणपुर जिले का जिम्मा है। बैठक के दौरान जब क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने जिलाध्यक्षों से पूछा कि प्रभारी मंत्री नियमित दौरे पर आते हैं या नहीं? तो तीनों जिलों के अध्यक्ष, जिला प्रभारी और विधायकों ने जो जवाब दिया, वह मंत्री जी को असहज करने वाला था। पदाधिकारियों ने बताया कि मंत्री जी जिलों में बहुत कम आते हैं। कभी-कभार अगर दर्शन दे भी दें तो भाजपा कार्यालय का रुख नहीं करते। कार्यकर्ताओं के लिए उनके पास वक्त ही नहीं रहता।
इस पर जब टंकराम वर्मा सफाई देने लगे और जिलों में चल रहे विकास कार्यों का ब्योरा बताने लगे, तो उनकी नजरें बार-बार विधायक अजय चंद्राकर की तरफ जा रही थीं। उनका यह रवैया देखकर अजय जामवाल ने कहा, 'मंत्री आप हैं या विधायक जी? अगर ऐसा ही चलता रहा तो क्या आपका प्रभार बदलना पड़ेगा?' इस बात पर बैठक में जमकर ठहाके लगे। वैसे बता दें कि टंकराम को संगठन की तरफ से पहले भी ऐसी चेतावनी मिल चुकी है।
ऐसा नहीं कि बैठक में सिर्फ शिकायतें ही हुईं। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के कामकाज की काफी तारीफ भी हुई। राजनांदगांव के प्रभार वाले गजेंद्र यादव के बारे में पदाधिकारियों ने बताया कि वे नियमित तौर पर जिले में आते हैं और वहां विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट भी दिया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की गैरमौजूदगी में भी वहां के पदाधिकारियों की तरफ से कोई गिला-शिकवा नहीं दिखा। वहीं, बलौदाबाजार और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का प्रभार संभाल रहे श्याम बिहारी जायसवाल की भी पीठ थपथपाई गई। मजे की बात यह है कि इन दोनों जिलों की छह विधानसभा सीटों में से भाजपा के पास सिर्फ दो हैं, फिर भी मंत्री के लगातार दौरों और नियमित डीएमएफ बैठकों की जमकर सराहना हुई।
इसके अलावा, सरकारी योजनाओं और कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी छाया रहा। संगठन ने पूछा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का फायदा जिले के आखिरी व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। इस पर कई जिलाध्यक्षों ने अपना दर्द बयां किया कि योजनाओं के छोटे-छोटे काम भी अटके पड़े हैं। कानून-व्यवस्था को लेकर भी कई जगहों से नाराजगी सामने आई। इसी बीच, बस्तर के मुद्दे पर गृह मंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने मोर्चा संभाला। उन्होंने बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद वहां के विकास के लिए क्या कार्ययोजना बनी है और जमीन पर किस तरह काम हो रहा है।
बैठक में पूरा फोकस उन 36 विधानसभा सीटों पर रहा, जहां भाजपा को हार मिली थी। इन इलाकों के प्रभारी मंत्रियों को दो टूक कह दिया गया है कि वे अपनी सक्रियता बढ़ाएं। वे लगातार दौरे करें, कार्यकर्ताओं से संवाद करें और आगामी रोडमैप तैयार करें। साथ ही, निगम और मंडलों के अध्यक्षों को भी एक-एक हारी हुई सीट की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। संगठन इनसे लगातार रिपोर्ट ले रहा है और प्रभारी मंत्रियों से भी इन सीटों के लिए आगे की रणनीति मांगी गई है।